शीत सत्र भारत की संसद का एक नियमित सत्र है, जिसे हर वर्ष नवंबर–दिसंबर के बीच बुलाया जाता है।
इसका उद्देश्य देश के कानून, नीतियाँ और राष्ट्रीय मुद्दों पर वर्ष के अंत से पहले व्यापक चर्चा और फैसले करना होता है। इसमें सरकार अपनी प्राथमिकताएँ बताती है और संसद देश से जुड़े महत्वपूर्ण विधेयकों पर काम करती है।
शीत सत्र क्यों होता है?
- वर्ष के अंत में लंबित विधेयकों को पूरा करने के लिए
- अगले वित्तीय वर्ष की नीतियों की तैयारी करने के लिए
- राष्ट्रीय सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और सामाजिक मुद्दों पर चर्चा के लिए
- सरकार के कामकाज का मूल्यांकन करने और विपक्ष को सवाल करने का मौका देने के लिए
सरल भाषा में कहा जाए तो:
शीत सत्र इसलिए होता है ताकि साल खत्म होने से पहले देश की दिशा तय करने वाले जरूरी फैसले पूरे कर लिये जाएं।
शीत सत्र कैसे चलता है?
- लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदन मिलते हैं
- मंत्री महत्वपूर्ण बिल पेश करते हैं
- विपक्ष सवाल उठाता है और बहस होती है
- मीडिया और जनता को रोज़ अपडेट मिलते हैं
- हर दिन सूचीबद्ध कार्यक्रम (Legislative Agenda) के आधार पर काम होता है
इस दौरान कई तरह की गतिविधियाँ होती हैं —
कानून बनाना, बहस, प्रश्नकाल, विपक्ष-सरकार डायलॉग, मत-विभाजन, रिपोर्ट पेश करना आदि।
2025 के शीत सत्र की खास बातें
यह सत्र कई कारणों से महत्वपूर्ण है —
- अर्थव्यवस्था और रोजगार सुधार से जुड़े बिल आ सकते हैं
- डिजिटल सुरक्षा और डेटा प्रोटेक्शन पर नई नीतियाँ रखी जा सकती हैं
- कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की उम्मीद
- अंतरराष्ट्रीय समझौतों और विदेश नीति पर भी संसद में जानकारी दी जा सकती है
इस सत्र की शुरुआत में प्रधानमंत्री के मीडिया संवाद से संकेत मिला है कि सरकार इस बार कई बड़े मुद्दों पर सक्रियता दिखाएगी।

