क्या आपने कभी महसूस किया है कि आप हर दिन अपना काम कर रहे हैं, परिवार संभाल रहे हैं, मुस्कुरा भी रहे हैं… लेकिन अंदर कहीं भारीपन है? बिना किसी बड़ी वजह के थकान, चिड़चिड़ापन, नींद की कमी या अचानक रो देने का मन?
हो सकता है आप “साइलेंट स्ट्रेस” का शिकार हों।
क्या होता है साइलेंट स्ट्रेस?
साइलेंट स्ट्रेस वह मानसिक दबाव है जो बाहर से दिखाई नहीं देता। इसमें इंसान सामान्य दिखता है, हँसता-बोलता है, लेकिन अंदर ही अंदर लगातार तनाव झेल रहा होता है।
यह धीरे-धीरे बढ़ता है और शरीर व दिमाग दोनों पर असर डालता है।
इसके आम लक्षण
- बिना ज्यादा काम किए भी लगातार थकान
- छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा आना
- नींद पूरी न होना या बार-बार जागना
- सिर दर्द या गर्दन में जकड़न
- लोगों से दूरी बनाने का मन
- दिल की धड़कन तेज महसूस होना
अक्सर लोग इन संकेतों को नजरअंदाज कर देते हैं। वे सोचते हैं, “ये तो बस थोड़ा सा तनाव है।” लेकिन यही छोटा तनाव धीरे-धीरे बड़ी समस्या बन सकता है।
साइलेंट स्ट्रेस क्यों बढ़ रहा है?
आज की तेज रफ्तार जिंदगी, मोबाइल की लत, आर्थिक दबाव, सोशल मीडिया की तुलना और “हमेशा मजबूत दिखने” की सोच — ये सब मिलकर मन पर दबाव बनाते हैं।
खासकर महिलाएँ और कामकाजी लोग अपनी भावनाएँ दबा लेते हैं, जिससे यह तनाव अंदर ही अंदर जमा होता रहता है।
इससे कैसे बचें?
- रोज 20–30 मिनट खुद के लिए निकालें
- मोबाइल से थोड़ी दूरी बनाएँ
- अपनी बात किसी भरोसेमंद व्यक्ति से शेयर करें
- हल्की एक्सरसाइज या टहलना शुरू करें
- जरूरत हो तो विशेषज्ञ से सलाह लें
याद रखिए, तनाव दिखे या न दिखे — वह असली होता है।
अपने मन की आवाज़ को अनसुना मत कीजिए। क्योंकि मानसिक स्वास्थ्य भी उतना ही जरूरी है जितना शारीरिक स्वास्थ्य।

