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साइलेंट स्ट्रेस: जब आप कहते हैं “सब ठीक है”… लेकिन अंदर से टूट रहे होते हैं

क्या होता है साइलेंट स्ट्रेस?

क्या होता है साइलेंट स्ट्रेस?

क्या आपने कभी महसूस किया है कि आप हर दिन अपना काम कर रहे हैं, परिवार संभाल रहे हैं, मुस्कुरा भी रहे हैं… लेकिन अंदर कहीं भारीपन है? बिना किसी बड़ी वजह के थकान, चिड़चिड़ापन, नींद की कमी या अचानक रो देने का मन?
हो सकता है आप “साइलेंट स्ट्रेस” का शिकार हों।

क्या होता है साइलेंट स्ट्रेस?

साइलेंट स्ट्रेस वह मानसिक दबाव है जो बाहर से दिखाई नहीं देता। इसमें इंसान सामान्य दिखता है, हँसता-बोलता है, लेकिन अंदर ही अंदर लगातार तनाव झेल रहा होता है।
यह धीरे-धीरे बढ़ता है और शरीर व दिमाग दोनों पर असर डालता है।

इसके आम लक्षण

अक्सर लोग इन संकेतों को नजरअंदाज कर देते हैं। वे सोचते हैं, “ये तो बस थोड़ा सा तनाव है।” लेकिन यही छोटा तनाव धीरे-धीरे बड़ी समस्या बन सकता है।

साइलेंट स्ट्रेस क्यों बढ़ रहा है?

आज की तेज रफ्तार जिंदगी, मोबाइल की लत, आर्थिक दबाव, सोशल मीडिया की तुलना और “हमेशा मजबूत दिखने” की सोच — ये सब मिलकर मन पर दबाव बनाते हैं।
खासकर महिलाएँ और कामकाजी लोग अपनी भावनाएँ दबा लेते हैं, जिससे यह तनाव अंदर ही अंदर जमा होता रहता है।

इससे कैसे बचें?

याद रखिए, तनाव दिखे या न दिखे — वह असली होता है।
अपने मन की आवाज़ को अनसुना मत कीजिए। क्योंकि मानसिक स्वास्थ्य भी उतना ही जरूरी है जितना शारीरिक स्वास्थ्य।

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