Pothole Complaint Online: सड़क के गड्ढे की शिकायत अब आप घर बैठे मोबाइल से कर सकते हैं। बस ये पता होना चाहिए कि वह सड़क किस विभाग की है। नगर निगम की है तो उसके ऐप या पोर्टल पर, PWD की है तो PWD के ऐप पर, और नेशनल हाईवे है तो NHAI के ऐप या 1033 नंबर पर। गड्ढे की फोटो, सही लोकेशन और शिकायत नंबर, बस यही तीन चीजें सबसे जरूरी हैं।
अब रही कितने दिन की बात। पूरे देश के लिए गड्ढे की मरम्मत की कोई एक तय दिन-सीमा नहीं है, ये राज्य और शहर के हिसाब से अलग-अलग है। केंद्र सरकार के शिकायत पोर्टल पर शिकायत निपटाने की सीमा 21 दिन की है। कुछ राज्यों में PWD ने खुद इससे बहुत कम समय रखा है, जैसे महाराष्ट्र में 72 घंटे। और अगर गड्ढा खतरनाक है, तो उम्मीद यही रखनी चाहिए कि दो-तीन दिन में कम से कम अस्थायी भराई हो जाए। नीचे पूरी बात आसान भाषा में है।
पहले ये देखिए कि सड़क किसकी है
ज्यादातर लोगों की शिकायत इसी वजह से अटक जाती है कि वो गलत विभाग को चली गई। नगर निगम को भेजी, सड़क निकली PWD की, और फिर शिकायत इधर से उधर घूमती रहती है। हफ्ते निकल जाते हैं और गड्ढा वहीं का वहीं।
मोटा हिसाब ऐसे समझ लीजिए। आपकी कॉलोनी या मोहल्ले की सड़क आमतौर पर नगर निगम या नगर पालिका की होती है। एक शहर से दूसरे शहर जाने वाली सड़कें, जिले और राज्य की बड़ी सड़कें PWD के पास होती हैं। कई बार शहर के अंदर की मुख्य सड़क भी PWD की निकलती है। जहां “NH” लिखा बोर्ड और टोल प्लाजा हो, वो नेशनल हाईवे है और वहां NHAI जिम्मेदार है। कुछ नई कॉलोनियों में सड़क विकास प्राधिकरण के पास भी हो सकती है।
पक्का पता न चले तो नगर निगम की हेल्पलाइन पर फोन करके पूछ लीजिए। और सच कहूं तो कई ऐप में शिकायत डालते ही सिस्टम खुद पहचान लेता है कि सड़क किसकी है, तो ज्यादा सिरदर्द लेने की जरूरत भी नहीं पड़ती।
शिकायत करने से पहले थोड़ी तैयारी
ऑनलाइन शिकायत में फोटो ही आपका सबसे बड़ा सबूत है। सिर्फ “हमारे यहां गड्ढा है” लिख देने से अफसर पर कोई असर नहीं पड़ता, लेकिन साफ फोटो देखकर काम टालना मुश्किल हो जाता है।
गड्ढे की एक फोटो पास से लीजिए और एक थोड़ी दूर से, ताकि जगह पहचानी जा सके। बगल में कोई चप्पल या पानी की बोतल रख दीजिए, इससे गहराई का अंदाजा लग जाता है। बारिश का पानी भरा हो तो वो भी फोटो में आने दीजिए, क्योंकि पानी भरा गड्ढा और खतरनाक होता है।
फोन की लोकेशन ऑन रखिए, ज्यादातर ऐप फोटो से ही जगह उठा लेते हैं। साथ में कॉलोनी का नाम और पास का कोई स्कूल, मंदिर या चौराहा भी लिख लीजिए। तारीख याद रखिए, क्योंकि देरी का हिसाब यहीं से शुरू होता है।
ऑनलाइन शिकायत के अलग-अलग रास्ते
शहर की सड़क हो तो नगर निगम का ऐप
अब लगभग हर बड़े शहर में नगर निगम का अपना ऐप, वेबसाइट या WhatsApp नंबर है। कुछ उदाहरण देखिए। बेंगलुरु में BBMP का Sahaaya ऐप है। मुंबई में BMC का Pothole QuickFix ऐप और MyBMC Assist नाम का WhatsApp चैटबॉट है। पुणे में Road Mitra ऐप है और नगर निगम का शिकायत पोर्टल भी। हैदराबाद में MyGHMC ऐप चलता है। दिल्ली में MCD-311 ऐप है, और PWD की सड़कों के लिए PWD की हेल्पलाइन 1908 है।
एक बात ध्यान रखिए। ऐप और नंबर बदलते रहते हैं, तो इस्तेमाल करने से पहले अपने शहर के नगर निगम की आधिकारिक वेबसाइट पर एक बार देख लीजिए। आपका शहर इस लिस्ट में न हो तो वहां की वेबसाइट पर “शिकायत” या “Grievance” वाला हिस्सा ढूंढिए, वहीं रास्ता मिल जाएगा।
राज्य की सड़क हो तो PWD का ऐप
कई राज्यों ने PWD की सड़कों के लिए अलग से ऐप बनाए हैं। महाराष्ट्र का PCRS ऐप राज्य के हाईवे के गड्ढों के लिए है। इसमें फोटो खींचकर शिकायत डालते ही शिकायत नंबर बन जाता है और संबंधित इंजीनियरों को SMS चला जाता है। नियम ये है कि जूनियर इंजीनियर 72 घंटे के अंदर मरम्मत करके ऐप में जवाब दे। अब इसका नया वर्जन PCRS 2.0 भी मंजूर हो चुका है।
गोवा PWD का भी अपना ऐप है, और वहां लक्ष्य है कि अच्छे मौसम में तीन दिन के भीतर शिकायत पर काम हो जाए। बारिश में थोड़ा ज्यादा वक्त लग सकता है। उत्तराखंड में भी गड्ढों की फोटो भेजने के लिए एक ऐप शुरू हुआ था। आपके राज्य में ऐसा कुछ है या नहीं, ये Play Store में “PWD” के साथ अपने राज्य का नाम डालकर खोज लीजिए।
नेशनल हाईवे हो तो Rajmargyatra ऐप
हाईवे के गड्ढे के लिए NHAI का आधिकारिक ऐप है Rajmargyatra। इसमें फोटो या वीडियो के साथ शिकायत डाल सकते हैं और लोकेशन अपने आप जुड़ जाती है। ऐप हिंदी में भी चलता है। इसी ऐप से 1033 हेल्पलाइन पर सीधे कॉल भी हो जाती है, जो चौबीस घंटे चालू रहती है। शिकायत डालने के बाद उसका स्टेटस इसी ऐप में देखते रहिए।
मुख्यमंत्री हेल्पलाइन और राज्य के पोर्टल
जब स्थानीय ऐप से बात न बने, तब ये रास्ता काम आता है। उत्तर प्रदेश में CM हेल्पलाइन का टोल-फ्री नंबर 1076 है, और जनसुनवाई पोर्टल भी चलता है। मध्य प्रदेश में CM हेल्पलाइन 181 है। राजस्थान में भी राज्य की शिकायत सेवा के लिए 181 नंबर चलता है। इनकी निगरानी ऊपर के स्तर पर होती है, इसलिए अफसर पर जवाब देने का दबाव ज्यादा रहता है। बस जाने से पहले अपने राज्य की सरकारी वेबसाइट पर नंबर एक बार देख लीजिए।
केंद्र सरकार का पोर्टल CPGRAMS
pgportal.gov.in केंद्र सरकार का शिकायत पोर्टल है। यहां एक बार रजिस्टर करके आप शिकायत डाल सकते हैं, और उसका एक यूनिक नंबर मिलता है जिससे स्टेटस देखा जा सकता है। इसकी खास बात ये है कि यहां शिकायत निपटाने की सीमा 21 दिन की है। अगर तब तक काम पूरा नहीं हो पाता, तो विभाग को बीच में एक अंतरिम जवाब देकर देरी की वजह और नया समय बताना होता है। जवाब से संतुष्ट न हों तो अपील का भी रास्ता है। नेशनल हाईवे या केंद्र से जुड़े मामलों में ये पोर्टल खास तौर पर काम का है।
सोशल मीडिया
X या फेसबुक पर नगर निगम, PWD या NHAI के आधिकारिक अकाउंट को टैग करके फोटो डालना भी चलता है, और कई बार तेजी से असर होता है क्योंकि बात सबके सामने आ जाती है। लेकिन इसे अकेला तरीका मत समझिए। पहले आधिकारिक शिकायत दर्ज कीजिए, फिर पोस्ट में उसका शिकायत नंबर भी डाल दीजिए।
ऑनलाइन शिकायत में क्या लिखें
लंबी कहानी लिखने की जरूरत नहीं। छोटा और सीधा लिखिए। कुछ ऐसा चलेगा:
“मेरे इलाके (कॉलोनी का नाम, पास का लैंडमार्क) में मुख्य सड़क पर करीब एक फुट गहरा गड्ढा हो गया है। इतने दिन से ये ऐसे ही पड़ा है और बारिश में पानी भरने से और खतरनाक हो गया है। यहां कई दोपहिया वाहन फिसल चुके हैं। फोटो और लोकेशन साथ में लगा रहा हूं। कृपया जल्द मरम्मत करवाएं।”
इसमें तीन चीजें जरूर हों: जगह, खतरे की वजह और फोटो। भाषा नरम रखिए, लेकिन मांग साफ रखिए। शिकायत दर्ज होते ही जो नंबर मिले, उसका स्क्रीनशॉट ले लीजिए। आगे यही काम आएगा।
कितने दिन में कार्रवाई होनी चाहिए
ये वो सवाल है जो लोग सबसे ज्यादा पूछते हैं, और इसका सीधा-सादा जवाब ये है कि गड्ढे की मरम्मत के लिए पूरे देश में एक कानूनी दिन-सीमा नहीं है। सब कुछ राज्य, शहर और आपकी शिकायत किस प्लेटफॉर्म पर गई, इस पर निर्भर करता है। फिर भी मोटा-मोटा हिसाब कुछ ऐसा है।
अगर गड्ढा बहुत खतरनाक है, जैसे हाईवे पर, व्यस्त सड़क पर या ऐसी जगह जहां हादसे का डर हो, तो अस्थायी भराई 24 से 72 घंटे में हो जानी चाहिए। कुछ राज्यों के PWD ऐप में 72 घंटे का नियम बाकायदा है।
सामान्य गड्ढा, यानी मोहल्ले या कॉलोनी की सड़क पर, तो आमतौर पर एक से दो हफ्ते में काम की उम्मीद करना ठीक है।
अगर शिकायत सरकारी पोर्टल या CM हेल्पलाइन पर गई है, तो वहां की अपनी समय-सीमा होती है। केंद्र के पोर्टल पर ये 21 दिन है। राज्यों की सीमा अलग-अलग है और शिकायत दर्ज करते समय पता चल जाती है।
पूरी सड़क दोबारा बनानी हो, तो उसमें टेंडर और बजट का चक्कर होता है और हफ्ते-महीने लग सकते हैं। लेकिन तब भी बीच में कम से कम अस्थायी राहत मिलनी चाहिए।
एक और बात। बारिश में डामर वाली मरम्मत टिकती नहीं, इसलिए कई जगह मानसून में सिर्फ अस्थायी भराई होती है और पक्का काम बाद में। ये देरी की जायज वजह हो सकती है, लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि गड्ढा खुला छोड़ दिया जाए। कम से कम निशान, बैरिकेड या अस्थायी भराई तो होनी ही चाहिए।
तय समय में कार्रवाई न हो तो क्या करें
शिकायत के बाद भी काम न हो, ये बहुत आम बात है। घबराइए मत, आगे के रास्ते भी हैं।
सबसे पहले उसी शिकायत नंबर से रिमाइंडर डालिए या दोबारा फोन कीजिए। नई शिकायत मत डालिए, क्योंकि उससे पुरानी तारीख का फायदा चला जाता है।
फिर ऊपर के अफसर तक जाइए। नगर निगम में जोनल अधिकारी और फिर कमिश्नर। PWD में सहायक इंजीनियर से अधिशासी अभियंता और फिर अधीक्षण अभियंता। इनके नंबर और ईमेल आमतौर पर विभाग की वेबसाइट पर मिल जाते हैं।
उसके बाद अपने वार्ड के पार्षद और विधायक को फोटो और शिकायत नंबर के साथ बताइए। स्थानीय नेता के कहने से काम अक्सर जल्दी हो जाता है।
फिर भी न हो तो RTI डालिए। ऑनलाइन भी डाल सकते हैं। उसमें पूछिए कि आपकी शिकायत पर क्या कार्रवाई हुई, फाइल किस अधिकारी के पास है और उस सड़क की मरम्मत के लिए कितना बजट पास हुआ है। RTI का नाम सुनते ही विभाग की रफ्तार अक्सर बदल जाती है, क्योंकि जवाब देना कानूनन जरूरी है।
अकेले शिकायत करने से बेहतर है मोहल्ले वालों के साथ मिलकर करना। बीस लोगों के दस्तखत वाली शिकायत का वजन अलग ही होता है। स्थानीय अखबार और न्यूज़ पोर्टल को भी बताइए, जनदबाव बनता है।
और अगर मामला बहुत गंभीर हो, तो आखिरी रास्ता हाई कोर्ट में जनहित याचिका का है। इसमें वकील की सलाह जरूर लीजिए।
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कानून आपके साथ है, ये जान लीजिए
2025 में सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि सुरक्षित और चलने लायक सड़क पाना संविधान के अनुच्छेद 21 यानी जीवन के अधिकार का हिस्सा है, और सड़क बनाना और संभालना सरकार की जिम्मेदारी है। इसी तरह बॉम्बे हाई कोर्ट ने गड्ढों की वजह से हुई मौतों और चोटों पर मुआवजे का आदेश दिया था, जिसमें मौत पर छह लाख रुपये और चोट के मामलों में पचास हजार से ढाई लाख रुपये तक की बात थी, और ये पैसा जिम्मेदार अफसरों और ठेकेदारों से वसूलने को भी कहा गया।
हाईवे वालों के लिए एक और बात। सुप्रीम कोर्ट ने केरल हाई कोर्ट का वो आदेश बरकरार रखा था जिसमें कहा गया कि गड्ढों से भरे हाईवे पर लोगों से टोल नहीं वसूला जा सकता। तो अगली बार टोल देते वक्त सड़क खराब मिले, तो शिकायत करने में झिझकिए मत।
गड्ढे की वजह से हादसा हो जाए तो
अगर गड्ढे की वजह से किसी को चोट लगी, या गाड़ी का नुकसान हुआ, तो मामला सिर्फ शिकायत का नहीं रह जाता। सबसे पहले घायल को अस्पताल पहुंचाइए। फिर गड्ढे और जगह की फोटो-वीडियो लीजिए, गवाहों के नाम और नंबर लिखिए और पुलिस को बताइए। अस्पताल की पर्ची, इलाज के कागज और गाड़ी की मरम्मत के बिल संभालकर रखिए।
हाईवे पर गाड़ी खराब हुई हो, तो NHAI या उस हिस्से को संभालने वाली कंपनी को लिखित शिकायत दीजिए। उसमें अपना नाम, गाड़ी का नंबर, तारीख, जगह, गड्ढे का ब्योरा, फोटो और मरम्मत का बिल जोड़िए। मुआवजे की मांग करनी हो तो पहले किसी वकील से सलाह जरूर ले लीजिए।
कुछ छोटी बातें जो असल में काम आती हैं
- शिकायत नंबर कभी मत खोइए। स्क्रीनशॉट ले लीजिए या डायरी में लिख लीजिए।
- अलग-अलग जगह शिकायत करना ठीक है, लेकिन हर शिकायत में बाकी के नंबर भी लिख दीजिए। इससे अफसर को समझ आता है कि बात कई जगह पहुंच चुकी है।
- मरम्मत हो जाए तो उसकी भी फोटो लीजिए। काम आधा-अधूरा हुआ या हफ्ते भर में उखड़ गया, तो ये फोटो ही बताएगी कि गड़बड़ी हुई है, और उसकी भी शिकायत हो सकती है।
- जब तक मरम्मत न हो, गड्ढे के किनारे ईंट-पत्थर रखकर या कोई निशान लगाकर लोगों को सचेत कर दीजिए, खासकर रात में और बारिश में। बस सड़क के बीच खड़े होकर ये काम मत कीजिए।
- अपने मोहल्ले का एक WhatsApp ग्रुप बनाइए और उसमें शिकायत नंबर और स्टेटस डालते रहिए। जब कई लोग एक ही शिकायत से जुड़ते हैं, तो अफसर पर दबाव अपने आप बढ़ता है।
- सरकारी काम में थोड़ा वक्त लगता है, पर जो लगातार पीछे लगा रहता है, उसकी शिकायत फाइलों के ढेर से ऊपर आ ही जाती है।
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