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PM CARES Fund, PMNRF और NDRF: तीन राहत कोष, तीन अलग सच — आखिर पारदर्शिता पर सवाल क्यों?

“PM CARES Fund, PMNRF और NDRF: तीन राहत कोष, तीन अलग सच — आखिर पारदर्शिता पर सवाल क्यों?”

“PM CARES Fund, PMNRF और NDRF: तीन राहत कोष, तीन अलग सच — आखिर पारदर्शिता पर सवाल क्यों?”

देश में आपदा या आपात स्थिति के समय राहत कार्यों के लिए अलग-अलग फंड बनाए गए हैं। लेकिन इन फंडों की कानूनी स्थिति, संचालन और पारदर्शिता को लेकर समय-समय पर बहस होती रही है। आइए तीन प्रमुख फंडों को अलग-अलग समझते हैं।

PM CARES Fund

PM CARES (Prime Minister’s Citizen Assistance and Relief in Emergency Situations Fund) मार्च 2020 में कोविड-19 महामारी के दौरान शुरू किया गया। इसका उद्देश्य आपात स्थितियों में राहत और पुनर्वास के लिए संसाधन जुटाना था—जैसे वेंटिलेटर, वैक्सीन समर्थन, ऑक्सीजन प्लांट आदि।

कानूनी ढांचा: सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह एक पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट है, न कि सरकारी फंड। इसमें स्वैच्छिक दान लिया जाता है; बजट से सीधा आवंटन नहीं होता।
ऑडिट: इसका ऑडिट स्वतंत्र चार्टर्ड अकाउंटेंट द्वारा कराया जाता है और रिपोर्ट वेबसाइट पर प्रकाशित की जाती है।
विवाद क्यों? विपक्ष का तर्क है कि प्रधानमंत्री पद से जुड़ा नाम, सरकारी प्रतीक और प्रशासनिक सहयोग होने के कारण अधिक पारदर्शिता—जैसे CAG ऑडिट—होनी चाहिए। सरकार का कहना है कि चूंकि यह सरकारी फंड नहीं है, इसलिए CAG या RTI के दायरे में नहीं आता।

Prime Minister’s National Relief Fund (PMNRF)

PMNRF की स्थापना 1948 में हुई थी। मूल उद्देश्य था—विभाजन के बाद आए शरणार्थियों की सहायता। बाद में इसका दायरा बढ़ाकर प्राकृतिक आपदाओं, गंभीर बीमारियों और अन्य आपात स्थितियों में मदद तक किया गया।

कानूनी ढांचा: यह भी एक चैरिटेबल ट्रस्ट के रूप में संचालित होता है और दान से चलता है।
ऑडिट: इसका ऑडिट भी स्वतंत्र ऑडिटर करते हैं; CAG ऑडिट अनिवार्य नहीं है।
बहस: चूंकि यह लंबे समय से चल रहा है, इसकी संरचना पर अपेक्षाकृत कम विवाद हुआ, लेकिन पारदर्शिता और सूचना तक पहुंच को लेकर सवाल समय-समय पर उठते रहे हैं।

National Disaster Response Fund (NDRF)

NDRF आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत स्थापित एक सरकारी फंड है। इसका उद्देश्य प्राकृतिक आपदाओं (बाढ़, भूकंप, चक्रवात आदि) में राज्यों को वित्तीय सहायता देना है।

कानूनी ढांचा: यह पूरी तरह सरकारी ढांचे का हिस्सा है।
ऑडिट: CAG द्वारा ऑडिट किया जाता है और संसद में लेखा प्रस्तुत किए जाते हैं।
विशेषता: यह बजटीय प्रावधान और सरकारी प्रक्रियाओं के तहत संचालित होता है।

पारदर्शिता का प्रश्न: बहस क्यों?

मुख्य विवाद PM CARES और PMNRF की कानूनी स्थिति पर केंद्रित है। सरकार का कहना है कि ये चैरिटेबल ट्रस्ट हैं—इसलिए इन्हें सरकारी फंड की तरह नहीं देखा जा सकता। विपक्ष का तर्क है कि जब प्रशासनिक सहायता, सरकारी मंचों पर अपील और खर्च का क्रियान्वयन सरकारी एजेंसियों से जुड़ा दिखता है, तो अधिक सार्वजनिक जवाबदेही होनी चाहिए।

यह कहना सही नहीं कि “चर्चा नहीं हो सकती।” संसद में सवाल उठाए गए हैं। लेकिन सरकार का औपचारिक रुख यही रहा है कि ये ट्रस्ट हैं, इसलिए सरकारी लेखा-जांच के दायरे में नहीं आते। यही कानूनी बनाम नैतिक/राजनीतिक जवाबदेही की बहस का केंद्र है।

तीनों फंड अलग कानूनी ढांचे में काम करते हैं—NDRF सरकारी है, जबकि PM CARES और PMNRF चैरिटेबल ट्रस्ट हैं। असली मुद्दा यह है कि आपदा राहत जैसे संवेदनशील क्षेत्र में कितनी पारदर्शिता पर्याप्त मानी जाए। कानूनी स्थिति स्पष्ट है, लेकिन सार्वजनिक भरोसा बनाए रखने के लिए पारदर्शिता पर चर्चा जारी रहना भी लोकतंत्र का हिस्सा है।

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