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निर्मला सीतारमण जिस लाल फोल्डर में बजट लाती हैं, आखिर वह है क्या?

वित्त मंत्री के हाथ में लाल बही क्यों होती है

वित्त मंत्री के हाथ में लाल बही क्यों होती है

भारत में हर साल प्रस्तुत किया जाने वाला बजट केवल आर्थिक घोषणाओं का दस्तावेज़ नहीं होता, बल्कि इसमें कई परंपराएँ और सांस्कृतिक संदेश भी जुड़े होते हैं। वर्ष 2019 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने उसी परंपरा में एक बड़ा बदलाव किया और बजट को लाल बही-खाते में पेश करके एक नई पहचान दी। यह बदलाव सिर्फ शैलीगत नहीं था, बल्कि इसके पीछे गहरा अर्थ छिपा था।

लाल बही-खाता क्या होता है?

लाल बही-खाता भारतीय परंपरा में लेखा-जोखा लिखने की सबसे पुरानी प्रणाली का हिस्सा है। व्यापारी, परिवार, और कई संस्थाएँ दशकों तक इसी तरह की लाल कपड़े में लिपटी बही का उपयोग करती थीं। यह पारंपरिक बही-खाता सिर्फ एक नोटबुक नहीं, बल्कि भरोसे और लेखांकन की शुद्धता का प्रतीक माना जाता था।

इस बही के लाल रंग का भी विशेष महत्व है। भारतीय संस्कृति में लाल रंग शुभता, ऊर्जा, समृद्धि और नए आरंभ का प्रतीक है। इसलिए आर्थिक वर्ष के सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज़ को लाल बही में पेश करना परंपरा और समृद्धि दोनों का संदेश देता है।

बजट ब्रीफकेस से बही-खाते तक का बदलाव

2019 से पहले भारत में हर वित्त मंत्री ब्रिटिश परंपरा के अनुसार बजट को एक ब्रीफकेस में पेश करता था। यह परंपरा अंग्रेज़ों के शासनकाल में शुरू हुई थी और दशकों तक चली।
निर्मला सीतारमण ने इस प्रतीक को बदलते हुए भारतीय पहचान को प्राथमिकता दी। उन्होंने ब्रीफकेस छोड़कर लाल बही-खाते का उपयोग करते हुए यह संकेत दिया कि भारत अब अपनी आर्थिक सोच में अधिक भारतीय और पारदर्शी है।

यह कदम यह भी दर्शाता है कि भारत पश्चिमी प्रतीकों को अपनाने के बजाय अपनी सांस्कृतिक जड़ों को सम्मान देने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

लाल बही-खाते का आर्थिक और सांस्कृतिक संदेश

लाल बही-खाते की शुरुआत से यह संदेश स्पष्ट हुआ कि बजट अब केवल आधुनिक अर्थव्यवस्था का दस्तावेज़ नहीं है, बल्कि यह परंपरा और आधुनिकता के संगम का प्रतीक भी है।
ब्रीफकेस जहाँ एक बंद, औपचारिक और कठोर ढाँचे का प्रतीक था, वहीं बही-खाता पारदर्शिता और सरलता का संकेत देता है।

इससे यह भी महसूस होता है कि भारत अपनी अर्थव्यवस्था में आधुनिक तकनीक और वैश्विक नीतियों को अपनाते हुए भी अपनी सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित रखना चाहता है।

भारत की नई पहचान का प्रतीक

जब भी वित्त मंत्री संसद में लाल बही लेकर प्रवेश करती हैं, यह दृश्य अब भारतीय बजट का एक स्थायी प्रतीक बन चुका है। यह न केवल आर्थिक दस्तावेज़ ले जाने का तरीका है, बल्कि एक संदेश है कि भारत अपनी परंपराओं के सम्मान के साथ आगे बढ़ रहा है।

लाल बही-खाता केवल एक फोल्डर नहीं, बल्कि भारत की आर्थिक सोच, सांस्कृतिक धरोहर और पारदर्शी प्रशासन का प्रतीक है।
निर्मला सीतारमण का यह कदम यह दिखाता है कि भारत अपनी आर्थिक नीतियों में परंपरा और आधुनिकता का संतुलन बनाए रखते हुए आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है।

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