NEET 2026: सरकार की चुप्पी, 22 लाख युवाओं का संकट
पेपर लीक पर विपक्ष जवाबदेही माँग रहा है, शिक्षा मंत्री मीडिया से भाग रहे हैं
भारत के शिक्षा तंत्र में एक बार फिर बड़ा संकट खड़ा हो गया है। 3 मई को आयोजित NEET परीक्षा को रद्द कर दिया गया क्योंकि लगभग 410 सवालों वाली दस्तावेज़ परीक्षा से 15 दिन से 1 महीने पहले WhatsApp पर फैली हुई थी। रसायन विज्ञान के 120 सवाल सीधे वास्तविक परीक्षा से मेल खाते थे। 22.79 लाख छात्रों का भविष्य दांव पर है, लेकिन सरकार निर्लिप्त बैठी है।
🔇 सरकार की खामोशी
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान 12 मई को पत्रकारों के सामने आए। उनसे पूछा गया – “आप क्या सोचते हैं?” उनका जवाब था – मौन। बस चले गए। कोई बयान, कोई जवाबदेही नहीं। जब पूरा देश सवाल पूछ रहा है कि आखिर यह कैसे हुआ, तो सरकार का सबसे बड़ा शिक्षा अधिकारी मीडिया से मुंह मोड़ लेता है। यह केवल राजनीतिक विफलता नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक जवाबदेही से पलायन है।
विपक्ष की आवाज़ें
सवाल जो अनुत्तरित हैं
जब देश का शिक्षा तंत्र टूट रहा है, तो सरकार क्यों निर्लिप्त है? क्यों शिक्षा मंत्री सवालों का जवाब देने से इनकार करते हैं? क्यों NTA (परीक्षा एजेंसी) बार-बार विफल हो रही है? ये सवाल तब तक अनुत्तरित रहेंगे जब तक सरकार “जवाबदेही” के अर्थ को समझना शुरू न करे। 22.79 लाख युवा इंतज़ार कर रहे हैं – न कि शब्दों का, बल्कि परिवर्तन का।

