मोदी का 5 देशों का ऐतिहासिक दौरा: ऊर्जा, रक्षा और टेक्नोलॉजी में बड़े समझौते — भारत को $40 बिलियन के निवेश का वादा
15 से 20 मई 2026 — UAE, नीदरलैंड्स, स्वीडन, नॉर्वे और इटली। छह दिन, पाँच देश, दर्जनों समझौते।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15 से 20 मई 2026 के बीच संयुक्त अरब अमीरात, नीदरलैंड्स, स्वीडन, नॉर्वे और इटली के दौरे पर रहे। यह दौरा महज एक कूटनीतिक यात्रा नहीं था — बल्कि ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा साझेदारी, टेक्नोलॉजी और व्यापार के मोर्चे पर भारत की वैश्विक स्थिति को नई मज़बूती देने का प्रयास था।
दौरे की शुरुआत UAE से हुई जहाँ मोदी ने राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद से मुलाकात की। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच यह बैठक कई मायनों में अहम रही। दोनों नेताओं ने India-UAE Comprehensive Strategic Partnership की समीक्षा की और ऊर्जा, व्यापार व रक्षा पर विस्तार से चर्चा हुई।
The Hague में मोदी ने भारतीय समुदाय को संबोधित किया और डच नेतृत्व से द्विपक्षीय वार्ता की। दोनों देशों ने मिलकर भविष्य की साझेदारी की नींव रखी।
स्वीडन दौरे में भारत और स्वीडन ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को एक नए स्तर पर ले जाने का फैसला किया। दोनों देशों के बीच रक्षा और हरित ऊर्जा में सहयोग के नए रास्ते खुले।
नॉर्वे दौरा कई मायनों में खास रहा। 43 साल बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने नॉर्वे की धरती पर कदम रखा। यहाँ तीसरा India-Nordic Summit आयोजित हुआ जिसमें Nordic देशों के नेताओं से द्विपक्षीय बातचीत हुई।
दौरे के अंतिम पड़ाव इटली में PM मोदी ने PM Giorgia Meloni से व्यापक बातचीत की। भारत-इटली संबंधों को एक नई ऊँचाई पर ले जाया गया।
इस पूरे दौरे में 50 से अधिक बड़ी global कंपनियों के CEOs से मुलाकात हुई। Semiconductors, Logistics, Green Infrastructure और Technology जैसे क्षेत्रों में कुल मिलाकर करीब $40 बिलियन (लगभग ₹3.5 लाख करोड़) के नए निवेश की प्रतिबद्धता मिली। यह दौरा दिखाता है कि दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाएँ और यूरोपीय देश भारत को एक अहम साझेदार के रूप में देख रहे हैं।
यह सभी आंकड़े अभी commitments हैं — यानी वादे। जब कोई देश या कंपनी MoU साइन करती है तो वह सिर्फ इरादा ज़ाहिर करती है, actual पैसा नहीं आता। इसके बाद दोनों देशों की regulatory मंज़ूरी, company का board approval, ज़मीन और legal framework — यह सब तैयार होने में 2 से 5 साल लग सकते हैं।

