जब Khan Sir रात-रात भर गरीब बच्चों को Railway, SSC, UPSC की तैयारी करवा रहे थे — तब किसी ने नहीं पूछा कि वो किस धर्म के हैं। जब उनके videos करोड़ों बार देखे जा रहे थे, Bihar Governor उनसे मिलने आ रहे थे, students उन्हें अपना hero बता रहे थे — तब भी किसी ने नहीं पूछा। लेकिन जैसे ही Patna में एक FIR दर्ज हुई — अचानक social media पर एक नई “खोज” हो गई: “अरे, यह तो Faisal Khan हैं! मुसलमान हैं! ये हमारे नहीं हो सकते।”
पहले भीड़ ने हमला किया — उसके बाद guards ने हवा में firing की। Sequence साफ है।
Rival coaching “Gyan Bindu” के Roshan Anand already गिरफ्तार और जेल में हैं।
Khan Sir accused हैं, दोषी नहीं। Weapons forensics में हैं, case court में है।
Police ने खुद कहा — firing अभी पूरी तरह confirm नहीं। जांच जारी है।
“Faisal Khan” उनका असली नाम है — FIR में legal नाम लिखना journalism की ज़रूरत है, यह समझ में आता है। लेकिन इस नाम को weapon की तरह इस्तेमाल करना, उनके धर्म को अचानक बीच में लाना — यह कुछ और है। जो लोग कल उनके videos share करते थे, आज वही “मुसलमान हैं, हमारे नहीं” कह रहे हैं।
उसने कभी धर्म देखकर शिक्षा नहीं बांटी — तो आज उसका धर्म क्यों देखा जा रहा है?
- लाखों गरीब बच्चों को मुफ्त या कम fees पर government exam की coaching दी।
- Railway Recruitment protests में students के साथ खड़े रहे — जब कोई नहीं था।
- BPSC paper leak और NEET पर खुलकर आवाज उठाई।
- Hospital और facilities बनाईं — बिना धर्म पूछे, बिना जाति देखे।
Khan Sir ने कभी अपनी coaching, अपनी मदद, अपना hospital — कुछ भी धर्म देखकर नहीं दिया। उनकी शिक्षा का कोई religion नहीं था। तो आज जब मुश्किल आई तो उनका धर्म क्यों निकाला गया? यह सवाल सिर्फ Khan Sir का नहीं — उस हर इंसान का है जो किसी के लिए कुछ करना चाहता है।
जो लोग आज “Faisal Khan, Faisal Khan” चिल्ला रहे हैं — वो कल भूल जाएंगे। लेकिन जिस बच्चे ने उनकी video देखकर Railway exam crack की, जिस लड़की ने उनके notes से BPSC पास की — वो नहीं भूलेगी। Identity politics एक दिन की होती है। शिक्षा पूरी जिंदगी की।

