हर घर जल का वादा था। लेकिन जहाँ नल लगे, वहाँ पानी नहीं आता। और जहाँ पानी है — वह पीने लायक नहीं।
दिसंबर 2025 में मध्यप्रदेश के इंदौर में नगर निगम का पानी पीकर 32 लोग मर गए और 1,400 से ज़्यादा बीमार पड़ गए। वजह थी — bacterial contamination। यह कोई अपवाद नहीं था, यह सिस्टम की असलियत है।
WaterAid की Global Water Quality Index में भारत 122 देशों में 120वें नंबर पर है, जिसे NITI Aayog के Composite Water Management Index ने confirm किया है। Yale University के Environmental Performance Index 2024 के अनुसार unsafe drinking water के मामले में भारत 180 देशों में 116वें स्थान पर है।
UN की चेतावनी — “Global Water Bankruptcy”
जनवरी 2026 में संयुक्त राष्ट्र ने एक रिपोर्ट में कहा कि दुनिया अब “Global Water Bankruptcy” के दौर में आ चुकी है — यानी इंसान ने पानी को उसकी renewal limit से कहीं ज़्यादा खर्च कर दिया है। भारत इस संकट के सबसे अगली कतार में है क्योंकि यहाँ दुनिया की 18% आबादी है लेकिन freshwater सिर्फ 4% है।
दिल्ली, बेंगलुरु, गुरुग्राम — शहर डूब रहे हैं
दिल्ली में 2024 में 19,000 से ज़्यादा illegal borewells पकड़े गए — आधे अब भी चल रहे हैं। शहर की ज़रूरत से 70 million gallons पानी कम पड़ रहा है हर रोज़। (ScienceDirect, 2024)
बेंगलुरु में हालत और भयावह है। शहर groundwater से 1,392 MLD खींचता है लेकिन natural recharge सिर्फ 148 MLD है — यानी सिर्फ 10%। CGWB के अनुसार Bengaluru के सभी 6 assessment zones “over-exploited” हैं। शहर की हरियाली 1970 में 68% थी, आज सिर्फ 3% बची है।
हरियाणा में किसानों को सस्ती बिजली मिलती है तो वे बेरोकटोक ट्यूबवेल चलाते हैं। SANDRP की मार्च 2026 की रिपोर्ट बताती है — जो ज़िले सबसे ज़्यादा subsidised electricity use करते हैं, वही सबसे ज़्यादा water-stressed हैं। Punjab के Bathinda में तो groundwater में uranium की मात्रा खतरनाक स्तर तक पहुँच गई है।
जल जीवन मिशन — नल लगे, पानी नहीं आया
सरकार का दावा है कि 2019 में जहाँ सिर्फ 3.23 करोड़ ग्रामीण घरों में नल था, वहाँ अब 15.83 करोड़ घरों तक पहुँच गया है। संख्या प्रभावशाली लगती है। लेकिन असलियत देखिए —
90% ग्रामीण घरों में tap connection हैं। 2.7 लाख गाँव “हर घर जल” घोषित हो चुके हैं।
NSS 79वें round के अनुसार सिर्फ 39% लोग इन नलों से पानी पीते हैं। UP, Bihar, Jharkhand में यह आँकड़ा 6% से 30% के बीच है।
6,38,550 piped water schemes में से सिर्फ 86,447 पूरी हुई हैं — बाकी 5.5 लाख अधूरी हैं। (India Water Portal, अप्रैल 2026) Jal Jeevan Mission की deadline पहले 2024 थी, फिर 2025 हुई, और अब 2028 कर दी गई है।

