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Jal Jeevan Mission Rajasthan: CAG रिपोर्ट में आधे घरों में नल नहीं पहुँचा, केंद्र से 70% कम पैसा मिला

al Jeevan Mission Rajasthan: CAG रिपोर्ट में आधे घरों में नल नहीं पहुँचा, केंद्र से 70% कम पैसा मिला

Jal Jeevan Mission Rajasthan: CAG रिपोर्ट में आधे घरों में नल नहीं पहुँचा, केंद्र से 70% कम पैसा मिला

Jal Jeevan Mission Rajasthan: CAG की रिपोर्ट के मुताबिक राजस्थान में जल जीवन मिशन का लक्ष्य 96,06,728 ग्रामीण घरों में चालू नल कनेक्शन देने का था, लेकिन 7 जनवरी 2025 तक सिर्फ़ 47,65,980 घरों (49.61%) तक ही कनेक्शन पहुँचा। यानी 48,40,748 घर (50.39%) अब भी बाकी थे। पैसे का हाल भी ऐसा ही रहा। केंद्र के हिस्से का कम इस्तेमाल होने की वजह से 2019 से 2025 के बीच राज्य को ₹29,145.92 करोड़ (70.38%) कम मिले, जबकि केंद्र का कुल आवंटन ₹41,414.24 करोड़ था। इस लेख में आसान भाषा में समझिए कि रिपोर्ट में और क्या मिला, ठेकों से लेकर पानी की जाँच और भूजल तक, और इसका आपके गाँव से क्या लेना-देना है।

जल जीवन मिशन क्या है और राजस्थान के लिए यह क्यों मायने रखता है

जल जीवन मिशन 15 अगस्त 2019 को शुरू हुआ था। इसका मकसद हर ग्रामीण घर में चालू नल कनेक्शन (Functional Household Tap Connection) देना है, यानी ऐसा नल जिसमें सच में पानी आए। राजस्थान देश का सबसे बड़ा राज्य है और देश के कुल क्षेत्रफल का 10.40% हिस्सा इसी में आता है। लेकिन देश के कुल सतही जल का सिर्फ़ 1.16% हिस्सा यहाँ है। कम बारिश और खेती और पीने के लिए भूजल के ज़्यादा इस्तेमाल की वजह से भूजल पहले ही खतरनाक स्तर तक नीचे जा चुका है। इसीलिए यहाँ यह योजना सिर्फ़ नल लगाने की नहीं, पानी का भरोसेमंद इंतज़ाम करने की भी है।

CAG ने अगस्त 2019 से मार्च 2024 की अवधि में PHED (जलदाय विभाग) के काम की जाँच की। कई आँकड़े जनवरी 2025 तक के हैं।

कितने घरों तक पहुँचा नल

रिपोर्ट के अनुसार जनवरी 2025 तक लक्ष्य के आधे से भी कम घरों में चालू नल कनेक्शन हो पाया था। CAG ने इसकी मुख्य वजहें बताई हैं: काम देने में देरी, क्षेत्रीय जल आपूर्ति योजनाओं (Regional Water Supply Scheme) के पूरा होने में देरी और उपलब्ध पैसे का कम इस्तेमाल।

योजना की रैंकिंग में भी राजस्थान पीछे रहा। अक्टूबर 2022 से मार्च 2024 के बीच “जल जीवन सर्वेक्षण” में राजस्थान 34 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में 30वें से 34वें स्थान के बीच रहा। यानी लगभग हर बार सबसे नीचे के कुछ राज्यों में।

“हर घर जल” का दर्जा सिर्फ़ गिने-चुने गाँवों को

किसी गाँव या पंचायत को “हर घर जल” का दर्जा तब मिलता है जब वहाँ हर घर में नल का पानी पहुँच जाए। जनवरी 2025 तक राजस्थान के 302 ब्लॉक में से सिर्फ़ एक ब्लॉक को यह दर्जा मिला था। ग्राम पंचायतों में 400 (3.56%) और गाँवों में 4,254 (10.05%) ही इस दर्जे तक पहुँचे थे। CAG ने इसे प्रमाणन की धीमी रफ़्तार बताया है।

स्कूलों और आँगनवाड़ी केंद्रों का हाल

रिपोर्ट में कुछ जगहों पर अच्छा काम भी दिखता है। स्वास्थ्य केंद्रों में 73.68%, पंचायत घरों में 87.27% और आश्रमशालाओं में 66.00% नल कनेक्शन हो चुके थे। लेकिन बच्चों से जुड़ी जगहों पर हालत कमज़ोर रही। स्कूलों में सिर्फ़ 41.12% और आँगनवाड़ी केंद्रों में 44.80% नल कनेक्शन हुए थे। अप्रैल 2024 तक पानी की गुणवत्ता से प्रभावित बस्तियों में से आधे से ज़्यादा, आदिवासी इलाके, आकांक्षी ज़िले और पिछड़े ब्लॉक भी योजना की धीमी प्रगति से जूझ रहे थे। यानी जिन जगहों को सबसे पहले पानी मिलना चाहिए था, वहाँ काम सबसे धीमा रहा।

केंद्र का पैसा और खर्च का हिसाब

इस योजना में केंद्र और राज्य दोनों पैसा लगाते हैं। CAG के मुताबिक 2019 से 2025 के बीच केंद्र के हिस्से का कम इस्तेमाल होने से ₹29,145.92 करोड़ कम जारी हुए, जो कुल आवंटन का 70.38% है। इसके अलावा रिपोर्ट में कुछ और बातें भी हैं:

ठेके, टेंडर और संदिग्ध भुगतान

ठेकों वाला हिस्सा रिपोर्ट के सबसे गंभीर हिस्सों में से है। विभाग ने लागत का सही आकलन नहीं किया, जिससे टेंडर रद्द हो गए। नतीजा यह रहा कि बारां, झालावाड़ और कोटा के 1,402 गाँवों के 1,52,437 घर सितंबर 2024 तक तीन साल से ज़्यादा समय से योजना के फायदे से वंचित थे। बारां की भोयल क्षेत्रीय जल आपूर्ति योजना पर CAG ने विभाग की निष्क्रियता को समझ से बाहर बताया और टेंडर प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए।

जाँचे गए 26 क्षेत्रीय योजनाओं में सिर्फ़ 8 तय समय पर पूरी हुईं, 2 योजनाएँ 447 से 744 दिन की देरी से पूरी हुईं और 16 योजनाएँ तय तारीख से 11 से 38 महीने बाद भी चल रही थीं। इन सभी 26 योजनाओं में ठेकेदारों को ₹122.31 करोड़ का भुगतान तीसरे पक्ष की जाँच और प्रमाणन के नियम का पालन किए बिना किया गया।

ऑडिट में ₹7.07 करोड़ के भुगतान संदिग्ध और अनियमित पाए गए। ये भुगतान ऐसे बिलों पर हुए थे जो फर्जी, गायब, रद्द या दोबारा इस्तेमाल किए हुए थे, या दूसरे ठेकेदारों के थे। जिन घरों में नल कनेक्शन पहले से चालू था, वहाँ के लिए भी ₹8.32 लाख के भुगतान संदिग्ध मिले। CAG ने करौली का एक उदाहरण भी दिया है, जहाँ बोली खुलने से पहले ही पाइप खरीद लिए गए और NOC जारी होने से पहले उन्हें सोजत सिटी भेज दिया गया। CAG के अनुसार इससे पूरी टेंडर प्रक्रिया पर संदेह पैदा होता है।

पानी की जाँच कितनी हुई

नल में पानी आना काफ़ी नहीं है, वह पीने लायक भी होना चाहिए। रिपोर्ट में इसी की सबसे बड़ी कमी दिखती है:

पानी की गुणवत्ता को जलापूर्ति से अलग रखने के लिए केंद्र ने 2 अक्टूबर 2022 तक “पेयजल गुणवत्ता आयुक्तालय” बनाने को कहा था। CAG के अनुसार इसका प्रस्ताव जुलाई 2022 में तैयार हो गया था, फिर भी अगस्त 2025 तक यह नहीं बना।

भूजल: नल लगा, पर पानी कहाँ से आएगा

रिपोर्ट के मुताबिक 2017 से 2024 के बीच अति-दोहन वाले ब्लॉक 185 (62.71%) से बढ़कर 214 (70.86%) हो गए। सुरक्षित ब्लॉक 45 (15.25%) से घटकर सिर्फ़ 37 (12.25%) रह गए। CAG ने इसे चिंताजनक रुझान बताया है।

जिन गाँवों में पानी का स्रोत ट्यूबवेल है, वहाँ भी स्थिति कमज़ोर मिली। जाँचे गए 9 ऐसे गाँवों में या तो रिचार्ज स्ट्रक्चर की योजना ही नहीं थी या वे बनाए ही नहीं गए। इससे स्रोत सूखने का खतरा रहता है, और मौसमी कमी की आशंका बढ़ती है। विभाग ने ग्रामीण जलापूर्ति योजनाओं का कोई पानी और ऊर्जा ऑडिट भी नहीं किया, इसलिए रिसाव, गैर-कानूनी कनेक्शन और बिजली की बर्बादी का पता ही नहीं चल सका।

गाँव की भागीदारी और रखरखाव

इस योजना की बुनियाद यह है कि गाँव खुद अपनी योजना बनाए और उसकी देखभाल करे। रिपोर्ट बताती है कि यह हिस्सा कमज़ोर रहा:

निगरानी और जवाबदेही की कमी

राज्य ने योजना में घरों में मीटर लगाने का कोई प्रावधान नहीं किया, इसलिए घरों तक असल में कितना पानी पहुँचता है, इसे नापने का कोई तरीका नहीं है। योजना का सेहत, लड़कियों की स्कूल छोड़ने की दर और रोज़गार पर असर परखने के लिए कोई मूल्यांकन अध्ययन भी नहीं हुआ। साफ़ दिशा-निर्देशों के बावजूद गाँवों में सोशल ऑडिट की कोई व्यवस्था नहीं बनाई गई, न तो कोई निर्देश जारी हुए, न किसी तीसरे पक्ष या NGO को यह काम दिया गया।

CAG ने सरकार को क्या सुझाया

आपके गाँव में नल न आए तो

अगर आपके घर में नल कनेक्शन नहीं मिला या नल लगा है पर पानी नहीं आता, तो शिकायत सीधे राज्य के सिस्टम में दर्ज कीजिए। उसकी पूरी प्रक्रिया, यानी PHED दफ्तर, Rajasthan Sampark (181) और CPGRAMS, हमारे अलग लेख “Jal Jeevan Mission Complaint” में बताई गई है।

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