देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो पिछले कुछ दिनों से गंभीर परिचालन संकट से जूझ रही है। नए ड्यूटी-नियम लागू होने के बाद 1 नवंबर 2025 से एयरलाइन पर दबाव बढ़ना शुरू हुआ, लेकिन 3 दिसंबर के बाद हालात अचानक बेकाबू हो गए।
कैसे शुरू हुआ संकट?
1 नवंबर को नए पायलट-ड्यूटी नियम लागू हुए, जिनमें पायलटों को अधिक विश्राम देने और रात की उड़ानों पर कड़े प्रावधान शामिल थे। एयरलाइन इन बदलावों के लिए पर्याप्त तैयार नहीं थी, जिसके कारण कई पायलट अचानक उपलब्ध नहीं रह सके और उड़ानें कम क्षमता पर चलने लगीं।
3 से 5 दिसंबर तक हालात क्यों बिगड़े?
दिसंबर के पहले हफ्ते में पायलटों की उपलब्धता और कम हो गई। 3 दिसंबर से उड़ानों के रद्द होने की श्रृंखला शुरू हुई और 4–5 दिसंबर तक सैकड़ों उड़ानें रद्द या घंटों देरी से चलीं। कई बड़े शहरों के हवाई अड्डों पर भीड़ और अफरा-तफरी का माहौल देखने को मिला।
इंडिगो संकट: अब तक कितनी उड़ानें रद्द हुईं?
- 5 दिसंबर 2025: सिर्फ एक दिन में 1,000 से ज़्यादा उड़ानें रद्द हुईं, जिससे देशभर के एयरपोर्ट्स पर अफरा-तफरी मच गई।
- 6 दिसंबर 2025: हालात पूरी तरह नहीं सुधरे, कई बड़े एयरपोर्ट्स से 400 से अधिक फ्लाइट्स रद्द करनी पड़ीं।
- 2–5 दिसंबर के बीच: कुल मिलाकर लगभग 1,200 से अधिक उड़ानें रद्द या गंभीर रूप से प्रभावित हुईं।
- यात्रियों पर असर: हजारों यात्री घंटों फँसे रहे, कई यात्रियों को वैकल्पिक उड़ानें भी बहुत देर से मिल पाईं।
- जाँच जारी: DGCA इस पूरे मामले की जाँच कर रही है और एयरलाइन से विस्तृत रिपोर्ट माँगी गई है।
यात्रियों को कैसी परेशानी हुई?
- अचानक फ्लाइटें रद्द होने से यात्रियों को हवाई अड्डों पर घंटों फँसा रहना पड़ा।
- कई लोगों की कनेक्टिंग उड़ानें छूट गईं और यात्रा योजनाएँ बिगड़ गईं।
- टिकट बदलने या नई टिकट लेने पर भारी अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ा।
- कई यात्रियों को होटल, भोजन और अन्य सुविधा पाने में भी मुश्किल आई।
एयरलाइन की स्थिति अब क्या है?
5 दिसंबर के बाद एयरलाइन ने नेटवर्क बहाल करने के लिए आपात कदम उठाए। उड़ानों को फिर से पटरी पर लाने की कोशिशें जारी हैं, लेकिन विशेषज्ञों का अनुमान है कि हालात पूरी तरह सामान्य होने में अभी समय लग सकता है।
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