दुनिया के 48 देश FIFA World Cup 2026 में खेल रहे हैं। स्टेडियम खचाखच भरे हैं। और भारत — 140 करोड़ की आबादी — एक बार फिर TV के सामने बैठकर देख रहा है।
सवाल पुराना है। जवाब हमेशा टाला जाता है। लेकिन इस बार एक संख्या सामने आई है — जो सब कुछ बयान कर देती है।
Ministry of Youth Affairs and Sports ने AIFF को वित्त वर्ष 2024–25 में ₹8.78 करोड़ दिए — training camps, tournaments और exposure tours के लिए। AIFF ने खर्च किए सिर्फ ₹4.38 करोड़।
75 साल पहले ticket था — फिर भी नहीं गए
बहुत कम लोग जानते हैं कि भारत एक बार FIFA World Cup के लिए qualify कर चुका है। 1950 में। ब्राज़ील में। बिना एक भी match खेले — क्योंकि बाकी सभी teams ने withdraw कर लिया था।
AIFF ने तब कहा — तैयारी का वक्त नहीं, पैसे नहीं। भारत गया नहीं। 75 साल बाद आज भी वही AIFF है, वही बहाने हैं — बस अब ticket भी नहीं मिलती।
बजट घटता गया, Yoga बढ़ती गई
2019–20 में AIFF को ₹30 करोड़ मिलते थे। आज वह घटकर ₹9 करोड़ रह गए। इसी दौरान Yoga funding में करीब 400% की बढ़ोतरी हुई।
Khelo India का बजट ₹800 करोड़ से ₹1,000 करोड़ ज़रूर हुआ — लेकिन football उस list में कहीं नहीं था।
“AIFF की अक्षमता का नतीजा यह है कि football — भारत का दूसरा सबसे लोकप्रिय खेल — governance की वजह से crisis में है।”
— Outlook India, दिसंबर 2025Fans हैं, System नहीं
Kerala, West Bengal, Goa, Manipur — इन राज्यों में football एक passion है, religion है। Sunil Chhetri जैसे खिलाड़ी इन्हीं में से निकले। लेकिन system ने उन्हें कभी वह मंच नहीं दिया जो उनकी प्रतिभा माँगती थी।
2025 में AIFF ISL के लिए नया commercial partner तक नहीं ढूंढ पाई — जिसके कारण league suspend हुई। यह सिर्फ mismanagement नहीं, यह पूरे ecosystem की विफलता है।
अगर AIFF मिले हुए ₹8.78 करोड़ में से आधे भी खर्च नहीं कर पाई, तो grassroots football कैसे बनेगी?
जब BCCI cricket में अकेले अरबों कमाता है — तो AIFF हमेशा “पैसे नहीं” क्यों कहती है?
और सबसे बड़ा सवाल — जवाबदेही किसकी? AIFF की, सरकार की, या उस मीडिया की जो हर बार World Cup आने पर यह सवाल उठाकर भूल जाती है?

