नई दिल्ली, 18 मार्च 2026 — मध्य-पूर्व में तनाव का माहौल है, समुद्री रास्ते बंद हैं और दुनिया भर के देश ऊर्जा संकट से जूझ रहे हैं। ऐसे मुश्किल वक्त में भारत के लिए एक राहत भरी खबर आई — दो भारतीय जहाज़ ‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’ होर्मुज जलडमरूमध्य को सफलतापूर्वक पार करके स्वदेश लौट आए हैं।
कैसे हुई वापसी?
ईरान-अमेरिका के बीच जारी संघर्ष के चलते होर्मुज जलडमरूमध्य बंद पड़ा था, जो दुनिया की सबसे अहम तेल-गैस आपूर्ति का रास्ता माना जाता है। इस बंदी से भारत की LPG आपूर्ति पर सीधा असर पड़ा। लेकिन भारत सरकार की सक्रिय कूटनीति रंग लाई और ईरान ने भारतीय जहाज़ों को इस मार्ग से गुज़रने की विशेष अनुमति दी।
‘शिवालिक’ 46,000 मीट्रिक टन से अधिक LPG लेकर गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह पहुँचा, जबकि ‘नंदा देवी’ लगभग 47,000 मीट्रिक टन LPG के साथ वाडीनार बंदरगाह पर सुरक्षित लंगर डाला।
देश को क्या फायदा?
इन दोनों जहाज़ों में लाई गई गैस को देश के अलग-अलग हिस्सों में वितरित किया जाएगा। इससे उन शहरों को सबसे ज़्यादा राहत मिलेगी जहाँ पिछले कुछ हफ्तों से गैस सिलेंडर की किल्लत बनी हुई थी और वितरकों के बाहर लंबी कतारें लग रही थीं।
अभी भी बाकी है काम
हालाँकि यह खबर उत्साहजनक है, लेकिन चुनौती अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई। होर्मुज के आसपास अब भी दर्जनों भारतीय जहाज़ फंसे हुए हैं और उनमें सैकड़ों भारतीय नाविक मौजूद हैं। सरकार उनकी सुरक्षित वापसी के लिए लगातार प्रयासरत है।
‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’ की वापसी यह साबित करती है कि भारत की विदेश नीति और नौसेना का आपसी तालमेल संकट की घड़ी में भी कारगर साबित होता है।
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