डायबिटीज आज के समय की सबसे सामान्य लेकिन गंभीर बीमारियों में से एक है। यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें शरीर में शुगर का स्तर बढ़ जाता है क्योंकि इंसुलिन हार्मोन या तो पर्याप्त मात्रा में नहीं बनता या फिर ठीक से काम नहीं करता।
डायबिटीज को कंट्रोल में रखना ज़रूरी है क्योंकि यह धीरे-धीरे शरीर के कई हिस्सों को प्रभावित करता है — जैसे हृदय, आंखें, किडनी और नसें।
कई लोग इसे सुनकर बहुत सख्त डाइट अपनाते हैं, जबकि सच यह है कि डायबिटीज में खाने की रोक-टोक से ज़्यादा ज़रूरी है संतुलित और समझदारी से बना डाइट प्लान।
संतुलित आहार का महत्व
डायबिटीज के मरीजों के लिए भोजन की मात्रा और समय दोनों बहुत मायने रखते हैं। शरीर को ऐसी डाइट चाहिए जो शुगर धीरे-धीरे रिलीज़ करे, ताकि ग्लूकोज़ लेवल स्थिर बना रहे।
इसलिए हर भोजन में कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट, फाइबर, प्रोटीन और हेल्दी फैट शामिल होना चाहिए।
सुबह के नाश्ते में ओट्स, दलिया या बेसन का चीला;
दोपहर में मिलेट रोटी, सब्ज़ी और सलाद;
और रात में हल्का, प्रोटीन युक्त भोजन बेहतर माना जाता है।
रोटी और चावल को लेकर फैला भ्रम
डायबिटीज मरीजों के बीच सबसे बड़ा कंफ्यूजन यह होता है कि रोटी खाना चाहिए या चावल।
अक्सर डॉक्टर या घर के बुजुर्ग सलाह देते हैं कि चावल मत खाओ, सिर्फ रोटी खाओ — लेकिन असली सच्चाई थोड़ी अलग है।
दरअसल, रोटी और चावल दोनों ही कार्बोहाइड्रेट के स्रोत हैं, और दोनों का शरीर पर असर उनके ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) पर निर्भर करता है।
ग्लाइसेमिक इंडेक्स यह बताता है कि कोई खाना खाने के बाद ब्लड शुगर कितनी तेजी से बढ़ाता है।
सफेद चावल का GI ऊँचा होता है, इसलिए यह ब्लड शुगर को जल्दी बढ़ाता है।
लेकिन अगर वही चावल ब्राउन राइस या स्टिकी राइस की जगह पके हुए ठंडे चावल (resistant starch) के रूप में खाए जाएँ, तो उनका असर बहुत कम हो जाता है।
इसी तरह रोटी में इस्तेमाल होने वाला आटा अगर मल्टीग्रेन, जौ, या चोकर युक्त है, तो उसका GI कम होता है और वह ब्लड शुगर को धीरे-धीरे बढ़ाता है।
असल में, फर्क रोटी या चावल का नहीं होता — फर्क उनकी क्वॉलिटी और मात्रा का होता है।
अगर आप चावल सीमित मात्रा में और फाइबर के साथ (जैसे सब्ज़ियों, सलाद या दाल के साथ) खाते हैं, तो वह भी डायबिटीज मरीज के लिए नुकसानदायक नहीं होता।
क्या डायबिटीज में रोटी बेहतर है?
रोटी को चावल की तुलना में ज़्यादा तरजीह इसलिए दी जाती है क्योंकि उसमें फाइबर और प्रोटीन थोड़ा अधिक होता है और यह पेट को लंबे समय तक भरा रखती है।
परंतु इसका मतलब यह नहीं कि चावल हानिकारक हैं।
संतुलन ही असली कुंजी है।
एक प्लेट में अगर आप आधी सब्ज़ियाँ, एक कटोरी दाल और थोड़ी मात्रा में चावल या एक रोटी लें — तो यह एक परफेक्ट डायबिटीज-फ्रेंडली प्लेट है।
डायबिटीज के मरीजों के लिए जरूरी खाने की बातें
- ज्यादा देर तक भूखे न रहें, छोटे-छोटे मील खाएँ।
- पानी पर्याप्त मात्रा में पिएँ।
- पैकेज्ड स्नैक्स, मिठाइयाँ और सॉफ्ट ड्रिंक्स से बचें।
- हर दिन कम से कम 30 मिनट वॉक करें।
- रात का खाना हल्का और जल्दी लें।
डायबिटीज मरीजों के लिए बेहतर विकल्प
| कैटेगरी | बेहतर विकल्प |
|---|---|
| कार्बोहाइड्रेट | ओट्स, जौ, ब्राउन राइस, मिलेट |
| प्रोटीन | पनीर, दाल, अंडा, मछली |
| फाइबर | हरी सब्जियाँ, सलाद, फल (सीमित मात्रा में) |
| फैट | देसी घी की थोड़ी मात्रा, बादाम, अखरोट |
नोट
दोस्तों डायबिटीज में भोजन को लेकर कई गलतफहमियाँ हैं, पर सच्चाई यह है कि किसी भी चीज़ को पूरी तरह छोड़ने की ज़रूरत नहीं होती।
जरूरी है कि आप क्या खाते हैं, कितना खाते हैं, और कब खाते हैं।
रोटी हो या चावल — दोनों सीमित मात्रा में, सही संयोजन के साथ लिए जाएँ तो कोई नुकसान नहीं करते।
संतुलित डाइट, नियमित व्यायाम और सकारात्मक जीवनशैली अपनाकर डायबिटीज को लंबे समय तक नियंत्रण में रखा जा सकता है।
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