दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण एक बार फिर बेहद चिंताजनक स्तर पर पहुँच गया है। हवा में मौजूद जहरीले तत्व सामान्य धूल-धुंध से कहीं अधिक गंभीर माने जा रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार समस्या सिर्फ स्मॉग की नहीं, बल्कि हवा में हो रही खतरनाक रासायनिक प्रतिक्रियाओं की वजह से प्रदूषण तेजी से बढ़ रहा है।
हवा में मौजूद रासायनिक प्रतिक्रियाएँ क्यों हो रही हैं खतरनाक?
वातावरण में नमी, तापमान में गिरावट और औद्योगिक उत्सर्जन के मेल से कई प्रकार की रासायनिक प्रतिक्रियाएँ बन रही हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि ये प्रतिक्रियाएँ हवा में ऐसे कण तैयार करती हैं जो फेफड़ों की अंदरूनी परत को तुरंत प्रभावित कर सकती हैं।
इसके कारण
- हवा का AQI तेजी से गिर रहा है
- सांस लेने में दिक्कतें बढ़ रही हैं
- अस्थमा और एलर्जी के मरीजों पर खतरा कई गुना बढ़ गया है
लोगों को दी गई यह विशेष सलाह
हेल्थ विशेषज्ञों ने निवासियों को हवा की इस गुणवत्ता को देखते हुए कई जरूरी सावधानियाँ अपनाने की सलाह दी है:
- सुबह-शाम बाहर टहलने से बचें
- मास्क का अनिवार्य रूप से उपयोग करें
- घरों में एयर-प्यूरीफायर चलाएं
- बच्चों और बुजुर्गों को बाहरी गतिविधियों से दूर रखें
- अधिक पानी पिएं और खिड़कियाँ सीमित समय के लिए ही खोलें
सरकार और एजेंसियाँ अलर्ट पर
वायु प्रदूषण नियंत्रण टीमें लगातार मॉनिटरिंग कर रही हैं। संभावित उपायों में ये कदम शामिल हो सकते हैं:
- निर्माण गतिविधियों पर रोक
- ट्रैफिक नियंत्रण
- उद्योगों की निगरानी
- ग्रैप (GRAP) के तहत अतिरिक्त नियम लागू करना
दिल्ली-NCR की हवा क्यों हर साल बिगड़ती है?
विशेषज्ञों का कहना है कि हर सर्दी में
- तापमान गिरता है
- हवा की गति कम होती है
- प्रदूषक कण नीचे जम जाते हैं
इससे हवा का शोधन प्राकृतिक रूप से नहीं हो पाता और प्रदूषण जमा होकर स्मॉग की परत बना देता है।

