दुनिया बदलते मौसम, बढ़ते तापमान और प्राकृतिक आपदाओं से जूझ रही है। ऐसे में पृथ्वी को बचाने के लिए दुनिया हर साल एक बड़े सम्मेलन में जुटती है — इसे COP (Conference of the Parties) कहा जाता है।
अब आने वाला बड़ा सम्मेलन होगा COP-30, जो वैश्विक जलवायु नीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
COP-30 क्या है?
COP-30, संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन फ्रेमवर्क (UNFCCC) का 30वां वार्षिक सम्मेलन है।
इसमें दुनिया के लगभग 200 देश शामिल होते हैं और सभी मिलकर फैसला करते हैं कि पृथ्वी को गर्म होने से कैसे रोका जाए।
इसमें ये मुद्दे तय होते हैं:
- ग्रीनहाउस गैसों को कितना कम किया जाएगा
- विकास और उद्योगों पर पर्यावरण के नियम
- गरीब देशों के लिए जलवायु फंड
- क्लाइमेट चेंज से निपटने की टेक्नोलॉजी सहायता
- भविष्य की वैश्विक जलवायु रणनीति
यह दुनिया का वह मंच है जहाँ पृथ्वी का भविष्य तय होता है।
COP कैसे काम करता है?
COP के तीन बड़े उद्देश्य होते हैं:
1. उत्सर्जन कम करने के लक्ष्य (Emission Targets)
हर देश बताता है कि वह कितनी कार्बन गैस कम करेगा।
इसे NDC – Nationally Determined Contributions कहते हैं।
2. पैसे का फैसला (Climate Finance)
अमीर देशों को तय करना होता है कि वे गरीब और विकासशील देशों को पर्यावरण सुधार के लिए कितना पैसा देंगे।
3. टेक्नोलॉजी और नीतियाँ
मौसम सुधारने वाली नई तकनीकें —
जैसे:
- ग्रीन एनर्जी
- इलेक्ट्रिक वाहन
- कार्बन कैप्चर टेक्नोलॉजी
- जंगल संरक्षण नीति
इनका वैश्विक नियम COP में बनता है।
COP-30 कहाँ होगा?
COP-30 की मेजबानी ब्राज़ील को मिली है।
यह Amazon Rainforest के कारण बहुत अहम है, क्योंकि अमेज़न दुनिया का “फेफड़ा” कहा जाता है।
दुनिया में भारत की स्थिति (India’s Role & Rank)
भारत दुनिया के सबसे प्रभावी और जिम्मेदार देशों में शामिल है।
भारत की भूमिका इतनी अहम क्यों है:
1. उत्सर्जन में भारत की रैंक
- भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा CO₂ उत्सर्जक है (क्योंकि जनसंख्या अधिक है)।
लेकिन प्रति व्यक्ति उत्सर्जन बहुत कम है — यानी एक भारतीय औसतन बहुत कम कार्बन निकालता है।
यह भारत की एक बड़ी खासियत है।
2. भारत की उपलब्धियाँ
- दुनिया का सबसे बड़ा Renewable Energy प्रोग्राम
- दुनिया का सबसे बड़ा सोलर पार्क
- अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) की स्थापना
- इलेक्ट्रिक मोबिलिटी पर तेजी से काम
- कार्बन उत्सर्जन को कम करने की तेज़ गति
3. भारत के COP लक्ष्यों
भारत ने यह लक्ष्य रखा है:
- 2030 तक 50% बिजली ग्रीन ऊर्जा से
- 2070 तक नेट-जीरो लक्ष्य हासिल करना
- CO₂ उत्सर्जन की कार्बन इंटेंसिटी कम करना
- जंगल और हरित क्षेत्र बढ़ाना
4. ग्लोबल सम्मान
भारत को COP में एक जिम्मेदार, संतुलित और विकास-हितैषी देश माना जाता है।
भारत न तो ग्लोबल पॉल्यूशन के लिए मुख्य कारण है,
और न ही गलत ऊर्जा उपयोग के लिए जाना जाता है।
इसके बावजूद भारत पर्यावरण सुधार में सबसे आगे है।
COP-30 भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
- भारत की अर्थव्यवस्था तेज़ी से बढ़ रही है — ऐसे में “हरी विकास नीति” जरूरी है।
- भविष्य में भारत ग्रीन हाइड्रोजन, सोलर और EV सेक्टर का वैश्विक लीडर बन सकता है।
- भारत को जलवायु फंड की ज़रूरत भी है, क्योंकि मौसम बदलने से खेती और पानी प्रभावित होता है।
COP-30 भारत के लिए अपनी नीतियों को दुनिया के सामने मजबूत तरीके से रखने का बड़ा मंच होगा।
COP-30 केवल एक सम्मेलन नहीं, बल्कि पृथ्वी का भविष्य तय करने वाली वैश्विक बैठक है।
भारत इसमें न सिर्फ एक महत्वपूर्ण सदस्य है, बल्कि जलवायु न्याय (Climate Justice) और स्वच्छ ऊर्जा का मजबूत समर्थक भी है।
भारत की आवाज़ COP-30 में और भी प्रभावशाली होगी —
क्योंकि भारत दुनिया को यह संदेश देता है:
“विकास भी जरूरी है और पर्यावरण भी।”

