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सरकारी स्कूलों की हालत पर रिपोर्ट: सरकार की लापरवाही से बच्चों का भविष्य खतरे में

सरकारी स्कूलों की बदहाल स्थिति_ बच्चों का भविष्य किसके हाथ में_

सरकारी स्कूलों की बदहाल स्थिति_ बच्चों का भविष्य किसके हाथ में_

भारत में शिक्षा को सबका अधिकार कहा गया है, लेकिन सरकारी स्कूलों की हालत देखकर यह अधिकार केवल कागज़ों तक सीमित लगता है।
हर साल सरकारें शिक्षा सुधार के बड़े-बड़े दावे करती हैं, मगर ज़मीन पर हालात जस के तस हैं।
कई राज्यों में सरकारी स्कूलों की स्थिति इतनी खराब है कि बच्चे टूटे कमरों, बिना शिक्षकों और बिना संसाधनों के पढ़ने को मजबूर हैं।

1. सरकारी स्कूलों की ज़मीनी हकीकत

देश के ग्रामीण इलाकों में सरकारी स्कूलों की स्थिति सबसे दयनीय है।

2. सरकारी दावे बनाम हकीकत

हर साल बजट में शिक्षा को प्राथमिकता देने की बात होती है, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका कोई असर नहीं दिखता।
ASER रिपोर्ट 2024 के अनुसार:

3. शिक्षकों की भारी कमी और जवाबदेही का अभाव

देश के कई राज्यों में शिक्षकों के हजारों पद वर्षों से खाली हैं।
जो शिक्षक कार्यरत हैं, उन्हें अक्सर शिक्षण के बजाय प्रशासनिक कार्यों में लगा दिया जाता है —
जैसे जनगणना, चुनाव ड्यूटी या राशन सर्वेक्षण।
इस वजह से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है और सीखने की प्रक्रिया कमजोर हो जाती है।

4. सुविधाओं और संसाधनों की कमी

अधिकांश सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाएँ तक नहीं हैं।

5. शिक्षा की गुणवत्ता क्यों गिर रही है?

गुणवत्ता गिरने के कई कारण हैं —

6. सरकार की भूमिका और ज़िम्मेदारी

सरकारों ने शिक्षा के नाम पर योजनाएँ तो शुरू की हैं, लेकिन उनका प्रभाव दिख नहीं रहा।
पिछले वर्षों में “स्कूल परिवर्तन योजना”, “स्मार्ट क्लास”, और “ऑनलाइन एजुकेशन” जैसे कई प्रोजेक्ट शुरू हुए,
मगर इनमें से अधिकांश रिपोर्टिंग तक सीमित रहे।
जमीनी स्तर पर बदलाव लाने के लिए सरकार को चाहिए —

7. क्या हैं सुधार की असली राह?

  1. स्कूलों में शिक्षक-छात्र अनुपात संतुलित करना।
  2. ग्रामीण स्कूलों के इन्फ्रास्ट्रक्चर पर विशेष ध्यान देना।
  3. शिक्षकों को प्रशासनिक कार्यों से मुक्त करना।
  4. अभिभावकों और पंचायतों को स्कूल निगरानी में शामिल करना।
  5. शिक्षा बजट के उपयोग की नियमित सार्वजनिक रिपोर्टिंग करना।

नोट

भारत का भविष्य तभी सुरक्षित होगा जब हर बच्चे को समान अवसर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलेगी।
आज सरकारी स्कूलों में बच्चे नहीं, बल्कि पूरा सिस्टम पिछड़ चुका है।
सरकार अगर सच में “नई शिक्षा नीति” को ज़मीन पर उतारना चाहती है, तो उसे सबसे पहले सरकारी स्कूलों की नींव मज़बूत करनी होगी।
वरना आने वाले वर्षों में शिक्षा का अधिकार सिर्फ़ एक सपना बनकर रह जाएगा।

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