भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा जनसंख्या वाला देश है, लेकिन स्वास्थ्य सेवाओं के मामले में अभी भी कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। इनमें से सबसे बड़ी समस्या है – डॉक्टरों की कमी। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मानक के अनुसार, हर 1,000 लोगों पर कम से कम 1 डॉक्टर होना चाहिए। जबकि भारत में यह अनुपात अभी भी काफी कम है। इस कारण से ग्रामीण इलाकों और छोटे कस्बों में लोगों को समय पर सही इलाज नहीं मिल पाता।
भारत में डॉक्टरों की कमी की वर्तमान स्थिति
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत में लगभग 1.4 बिलियन की जनसंख्या है, लेकिन रजिस्टर्ड डॉक्टरों की संख्या अपेक्षाकृत कम है। शहरी क्षेत्रों में तो डॉक्टर उपलब्ध हैं, लेकिन ग्रामीण इलाकों में डॉक्टर-जनसंख्या अनुपात बेहद खराब है। परिणामस्वरूप, छोटे गाँवों और कस्बों के लोग अक्सर कंपाउंडर, झोलाछाप डॉक्टर या वैकल्पिक चिकित्सा पर निर्भर हो जाते हैं।
डॉक्टरों की कमी के प्रमुख का
1. मेडिकल सीटों की सीमित संख्या
भारत में हर साल लाखों छात्र मेडिकल प्रवेश परीक्षा (NEET) देते हैं, लेकिन MBBS और PG सीटों की संख्या बहुत कम है। सीटों की कमी के कारण योग्य विद्यार्थी भी डॉक्टर नहीं बन पाते।
2. शहरी और ग्रामीण असमानता
ज्यादातर डॉक्टर शहरों में काम करना पसंद करते हैं, क्योंकि वहाँ बेहतर सुविधाएँ, आय और जीवनशैली उपलब्ध होती है। ग्रामीण क्षेत्रों में ढाँचागत कमी, साधनों की कमी और असुरक्षा के कारण डॉक्टर वहाँ काम नहीं करना चाहते।
3. शिक्षा की ऊँची लागत
मेडिकल शिक्षा भारत में बेहद महँगी है। प्राइवेट कॉलेजों की फीस आम छात्रों की पहुँच से बाहर है। महँगी पढ़ाई पूरी करने के बाद डॉक्टर उच्च आय वाले क्षेत्रों की तरफ जाते हैं, जिससे ग्रामीण इलाकों की स्थिति और खराब हो जाती है।
4. ब्रेन ड्रेन (Brain Drain)
भारत के कई प्रतिभाशाली डॉक्टर विदेशों में नौकरी करना पसंद करते हैं। बेहतर सैलरी, रिसर्च के अवसर और सुविधाओं की वजह से डॉक्टर भारत छोड़कर बाहर चले जाते हैं।
5. स्वास्थ्य ढाँचे की कमी
कई बार सरकारी अस्पतालों में पर्याप्त दवाइयाँ, उपकरण या स्टाफ उपलब्ध नहीं होते। ऐसी स्थिति में डॉक्टर लंबे समय तक वहाँ टिकना नहीं चाहते।
डॉक्टरों की कमी से होने वाले नुकसान
- समय पर इलाज न मिलना – गाँवों और छोटे शहरों में मरीजों को छोटे-छोटे इलाज के लिए भी बड़े शहर जाना पड़ता है।
- बढ़ती मौतें और बीमारियाँ – समय पर इलाज न मिलने के कारण कई बीमारियाँ गंभीर रूप ले लेती हैं।
- निजी स्वास्थ्य पर निर्भरता – डॉक्टरों की कमी से लोग महंगे निजी अस्पतालों की तरफ जाते हैं, जिससे आर्थिक बोझ बढ़ता है।
समस्या का समाधान कैसे हो सकता है?
- मेडिकल सीटें बढ़ाना – सरकार को मेडिकल कॉलेजों और सीटों की संख्या बढ़ानी होगी। हाल ही में 10,000 नई सीटों की घोषणा इसी दिशा में एक बड़ा कदम है।
- ग्रामीण क्षेत्रों में प्रोत्साहन – ग्रामीण इलाकों में काम करने वाले डॉक्टरों को अतिरिक्त वेतन और सुविधाएँ दी जाएँ।
- शिक्षा को सस्ती बनाना – मेडिकल शिक्षा की लागत कम करनी होगी ताकि अधिक विद्यार्थी डॉक्टर बन सकें।
- स्वास्थ्य ढाँचे का सुधार – ग्रामीण अस्पतालों में आधुनिक सुविधाएँ और दवाइयाँ उपलब्ध कराना ज़रूरी है।
- ब्रेन ड्रेन पर रोक – डॉक्टरों को भारत में ही बेहतर अवसर और रिसर्च की सुविधाएँ देकर रोका जा सकता है।
भारत में डॉक्टरों की कमी सिर्फ संख्या की समस्या नहीं है, बल्कि यह असमानता और ढाँचे की समस्या भी है। जब तक सरकार, समाज और स्वास्थ्य संस्थान मिलकर ठोस कदम नहीं उठाते, तब तक आम लोगों को इसका नुकसान झेलना पड़ेगा। हालाँकि नई मेडिकल सीटों की घोषणा एक सकारात्मक शुरुआत है, लेकिन लंबे समय तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ देने के लिए शिक्षा, ढाँचे और नीति – तीनों स्तरों पर सुधार ज़रूरी है।
FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)
Q1. भारत में डॉक्टरों की कमी क्यों है?
भारत में मेडिकल सीटों की कमी, ग्रामीण क्षेत्रों में ढाँचे की कमजोर स्थिति, शिक्षा की ऊँची लागत और डॉक्टरों का विदेश जाना (ब्रेन ड्रेन) प्रमुख कारण हैं।
Q2. डॉक्टरों की कमी से आम लोगों पर क्या असर पड़ता है?
डॉक्टरों की कमी से समय पर इलाज नहीं मिल पाता, गंभीर बीमारियाँ बढ़ती हैं, ग्रामीण इलाकों के लोग मजबूरी में महंगे निजी अस्पतालों का सहारा लेते हैं और मौत का खतरा भी बढ़ जाता है।
Q3. भारत में डॉक्टरों की कमी का समाधान कैसे हो सकता है?
मेडिकल सीटें बढ़ाना, ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टरों को प्रोत्साहन देना, शिक्षा को सस्ता बनाना, स्वास्थ्य ढाँचे को सुधारना और डॉक्टरों को भारत में रिसर्च और अच्छे अवसर देना जरूरी है।
Q4. भारत में WHO के मानक के अनुसार डॉक्टर-जनसंख्या अनुपात कितना होना चाहिए?
WHO के अनुसार हर 1,000 लोगों पर 1 डॉक्टर होना चाहिए। भारत अभी इस अनुपात से पीछे है।
Q5. क्या हाल ही में सरकार ने डॉक्टरों की कमी दूर करने के लिए कोई कदम उठाया है?
हाँ, हाल ही में केंद्रीय कैबिनेट ने देशभर में 10,000 से अधिक नए MBBS और PG सीटों को मंजूरी दी है, जिससे भविष्य में डॉक्टरों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है।
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