भारत के महानायक अमिताभ बच्चन को दुनिया भर में उनकी अदाकारी के लिए जाना जाता है, लेकिन कम लोग जानते हैं कि एक समय उन्होंने राजनीति में भी कदम रखा था। यह सफर लंबा नहीं चला, लेकिन भारतीय राजनीतिक इतिहास में यह एक दिलचस्प अध्याय के रूप में ज़रूर दर्ज है।
राजनीति में unexpected एंट्री
1984 में देश के हालात और उस समय के माहौल में अचानक अमिताभ बच्चन ने राजनीति में आने का फैसला किया।
उन्होंने इलाहाबाद (अब प्रयागराज) लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा।
उनकी लोकप्रियता का अंदाज़ा इससे लगाया जा सकता है कि
उन्होंने रिकॉर्ड संख्या से चुनाव जीता, और जनता ने खुले दिल से उनका स्वागत किया।
इतिहास में दर्ज बड़ी जीत
अमिताभ बच्चन की जीत सिर्फ एक जीत नहीं थी, यह एक लहर थी।
लोग उन्हें एक साफ-सुथरी छवि, ईमानदारी और बदलाव के प्रतीक के रूप में देखते थे।
उनकी जीत उस समय संसद के सबसे चर्चित पलों में से एक बनी।
संसद में शुरुआती अनुभव
जब अमिताभ बच्चन संसद पहुँचे, तो उन्हें एक नई दुनिया से सामना हुआ।
एक तरफ उनका स्टारडम था, दूसरी तरफ राजनीति की जटिलता।
संसद के नियम, प्रक्रियाएँ और राजनीतिक वातावरण — यह सब उनके लिए बिल्कुल नया था।
उन्होंने पूरी गंभीरता के साथ काम किया, लेकिन जल्द ही उन्हें एहसास हुआ कि यह दुनिया फिल्मों की दुनिया से बहुत अलग है।
इस्तीफा और राजनीति से दूरी
लगभग तीन साल सांसद रहने के बाद उन्होंने राजनीति छोड़ने का फैसला किया।
उन्होंने साफ कहा कि वे “राजनीतिक व्यक्ति” नहीं हैं।
उनका मानना था कि वे इस क्षेत्र में उतना योगदान नहीं दे पा रहे जितना वे चाहते थे।
यह फैसला उनके ईमानदार और स्पष्ट स्वभाव को दिखाता है।
राजनीति छोड़ने के बाद
राजनीति छोड़ने के बाद वे फिर अपनी असली दुनिया — यानि फिल्मों में लौट आए।
इस बार वे और भी मजबूत होकर आए, और आगे के वर्षों में उन्होंने कई यादगार फिल्में दीं।
उनकी राजनीतिक यात्रा भले ही छोटी रही हो, लेकिन इसने यह साबित किया कि वे हर क्षेत्र में पूरी निष्ठा से काम करते हैं।
तो क्या अमिताभ बच्चन ने कभी राजनीति में कदम रखा था?
हाँ, और वह दौर भारतीय राजनीति की उन रोचक कहानियों में से एक है जिसे लोग आज भी याद करते हैं।
एक सुपरस्टार का सांसद बनना, जनता का अपार समर्थन और फिर ईमानदारी से राजनीति छोड़ देना — अमिताभ बच्चन के जीवन का यह अध्याय उन्हें और भी विशेष बनाता है।

