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भारत में AIIMS का इतिहास: 1956 से 2026 तक कब बने, किसने बनाए, कितने बने

भारत में AIIMS का इतिहास 1956 से 2026 तक कब बने, किसने बनाए, कितने बने

भारत में AIIMS का इतिहास 1956 से 2026 तक कब बने, किसने बनाए, कितने बने

⚡ इस article में क्या-क्या जानेंगे:
  • 1947 में आज़ादी के बाद पहला AIIMS कब और किसने बनाया — और क्यों दशकों तक सिर्फ एक ही रहा
  • 47 साल तक एक भी नया AIIMS क्यों नहीं बना — किस सरकार ने क्या किया और क्या नहीं किया
  • वाजपेयी सरकार ने 6 AIIMS का ऐलान किया, लेकिन बने किसकी सरकार में — पूरी सच्चाई
  • मोदी सरकार में कितने AIIMS बने, कितने अभी बन रहे हैं और कहाँ-कहाँ
  • 2026 तक भारत में कुल कितने AIIMS operational हैं — पूरी list

जब भी कोई बीमार पड़ता है और हालत गंभीर होती है, तो घर में एक ही बात सुनाई देती है — “AIIMS ले चलो।” यह नाम सुनते ही लगता है कि अब बेहतर होगा। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि यह AIIMS आए कहाँ से? कब बने? किसने बनाए? और इतने सालों में सिर्फ एक से 20 तक का सफर कैसे तय हुआ? आज यही जानते हैं — बिना किसी राजनीतिक पक्षपात के, सिर्फ facts के साथ।

शुरुआत — एक सपना, एक अस्पताल (1952–1956)

बात है आज़ादी के ठीक बाद की। देश नया-नया आज़ाद हुआ था, हर तरफ problems ही problems थीं — अनाज नहीं, पैसे नहीं, infrastructure नहीं। ऐसे में एक महिला थीं — राजकुमारी अमृत कौर — जो भारत की पहली Health Minister थीं। उन्होंने सपना देखा कि देश में एक ऐसा medical institute हो जो world-class हो। एक ऐसी जगह जहाँ गरीब से गरीब आदमी भी इलाज करवा सके और देश के डॉक्टर भी यहीं पढ़ें, यहीं research करें।

1952 में नींव रखी गई और 1956 में संसद में All India Institute of Medical Sciences Act पास हुआ। इस तरह AIIMS नई दिल्ली का जन्म हुआ — भारत का पहला और उस वक्त एकमात्र AIIMS। इसे “Institute of National Importance” का दर्जा दिया गया, यानी यह सिर्फ एक अस्पताल नहीं, देश की शान था।

📌 जानने वाली बात पहले यह plan था कि AIIMS कलकत्ता में बनेगा। लेकिन राजनीतिक कारणों से location बदलकर नई दिल्ली कर दी गई। अगर यह decision नहीं बदला होता, तो शायद आज AIIMS दिल्ली की जगह AIIMS कलकत्ता होता। (स्रोत: v4edusolution.com)

47 साल का सूखा — 1956 से 2003 तक एक भी नया AIIMS नहीं

यह वो दौर है जिसके बारे में बहुत कम लोग बात करते हैं। आज़ादी के बाद से लेकर 2003 तक — यानी पूरे 47 साल — भारत में एक भी नया AIIMS नहीं बना। इस दौरान इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, नरसिम्हा राव, देवेगौड़ा, गुजराल — सभी आए और गए। लेकिन AIIMS के मामले में सब खाली हाथ रहे।

इसके पीछे कई कारण थे। पहले दशकों में देश की प्राथमिकता basic survival थी — Primary Health Centers बनाना, polio और TB जैसी बीमारियों से लड़ना। फिर 1975 का Emergency आया, 1984 की त्रासदी आई, 1991 का economic crisis आया जब देश का सोना तक गिरवी रखना पड़ा। इन हालातों में बड़े medical institutes बनाना किसी की priority list में ऊपर नहीं था।

“1956 से 2003 तक — 47 साल में एक भी नया AIIMS नहीं। इस दौरान देश में 8 प्रधानमंत्री बदले, लेकिन दिल्ली का AIIMS अकेला खड़ा रहा।”

इसका नतीजा यह हुआ कि पूरे देश के मरीज दिल्ली की तरफ भागते थे। बिहार से, राजस्थान से, ओडिशा से, उत्तराखंड से — सब एक ही जगह। AIIMS दिल्ली पर बोझ इतना बढ़ गया कि वहाँ appointment लेना भी एक बड़ी लड़ाई बन गई।

वाजपेयी सरकार — वो ऐलान जिसने बदल दी तस्वीर (2003)

साल 2003। प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी Independence Day पर लाल किले से बोले और एक बड़ा ऐलान किया — देश में 6 नए AIIMS बनेंगे। इसके लिए एक नई योजना लॉन्च हुई जिसका नाम था Pradhan Mantri Swasthya Suraksha Yojana (PMSSY)

तय हुआ कि ये 6 AIIMS बनेंगे — भोपाल (मध्यप्रदेश), भुवनेश्वर (ओडिशा), जोधपुर (राजस्थान), पटना (बिहार), रायपुर (छत्तीसगढ़) और ऋषिकेश (उत्तराखंड) में। सोच यह थी कि देश के अलग-अलग हिस्सों में healthcare पहुँचे, लोगों को दिल्ली न भागना पड़े।

📌 यह बात ध्यान से समझें वाजपेयी सरकार ने 2003 में घोषणा की और foundation stones रखे गए। लेकिन 2004 में election हुए और सरकार बदल गई। इसलिए ये AIIMS बने तो — लेकिन अगली सरकार में। (स्रोत: The Quint, PTI)

मनमोहन सिंह / UPA सरकार — वाजपेयी के सपने को ज़मीन पर उतारा (2006–2014)

2004 में UPA सरकार आई। वाजपेयी की घोषणा को 2006 में officially approve किया गया और काम शुरू हुआ। यह काम आसान नहीं था — जमीन का अधिग्रहण, infrastructure, faculty की भर्ती — सब कुछ खरोंच से बनाना था।

आखिरकार 2012–2013 में ये छहों AIIMS operational हो गए — AIIMS भोपाल, AIIMS भुवनेश्वर, AIIMS जोधपुर, AIIMS पटना, AIIMS रायपुर और AIIMS ऋषिकेश। यानी 1956 के बाद पहली बार देश को एक साथ 6 नए AIIMS मिले।

इसी दौरान UPA सरकार ने एक और AIIMS की घोषणा की — AIIMS रायबरेली (उत्तरप्रदेश) में। लेकिन यह 2014 तक पूरी तरह functional नहीं हो पाया।

🔍 Credit किसका — वाजपेयी का या मनमोहन का? यह सवाल अक्सर social media पर debate का कारण बनता है। सच यह है कि घोषणा वाजपेयी ने की और निर्माण मनमोहन सरकार ने पूरा किया। दोनों का योगदान है — इसे इकतरफा बताना गलत होगा। (स्रोत: The Quint)

मोदी सरकार — AIIMS का सबसे बड़ा विस्तार (2014–2026)

2014 में NDA सरकार आई और AIIMS के मामले में एक नया chapter शुरू हुआ। 15 नए AIIMS की घोषणा हुई — जो अब तक का सबसे बड़ा expansion था। इनमें से ज़्यादातर PMSSY के Phase 2, 3 और 4 के तहत आए।

धीरे-धीरे ये AIIMS बनने लगे और 2019 से 2024 के बीच एक के बाद एक operational होते गए। आज 2026 तक इनमें से लगभग 13 AIIMS पूरी तरह काम कर रहे हैं।

📊 मोदी सरकार में बने / operational हुए AIIMS की list: AIIMS नागपुर (महाराष्ट्र) • AIIMS मंगलगिरि (आंध्रप्रदेश) • AIIMS गोरखपुर (UP) • AIIMS कल्याणी (पश्चिम बंगाल) • AIIMS बठिंडा (पंजाब) • AIIMS बिबीनगर (तेलंगाना) • AIIMS देवघर (झारखंड) • AIIMS गुवाहाटी (असम) • AIIMS विजयपुर / सांबा (जम्मू) • AIIMS बिलासपुर (हिमाचल प्रदेश) • AIIMS राजकोट (गुजरात) • AIIMS मदुरै (तमिलनाडु) • AIIMS रायबरेली (UP — UPA का अधूरा, मोदी काल में पूरा) (स्रोत: motion.ac.in, iQuanta)

अभी भी निर्माणाधीन — 2026 में कहाँ-कहाँ बन रहे हैं AIIMS?

कुछ AIIMS अभी भी बनने की प्रक्रिया में हैं। इनमें सबसे चर्चित है AIIMS अवंतीपोरा (कश्मीर), जो 2026 के अंत तक पूरी तरह operational होने की उम्मीद है। इसके अलावा AIIMS दरभंगा (बिहार), AIIMS रेवाड़ी (हरियाणा), AIIMS बेंगलुरु (कर्नाटक), AIIMS मणिपुर और AIIMS केरल भी निर्माण के अलग-अलग चरणों में हैं।

यानी जो AIIMS आज नक्शे पर नहीं हैं, वो कुछ सालों में शायद आपके शहर के पास भी होंगे।

एक नज़र में — 1947 से 2026 तक का पूरा सफर

सरकार / दौर घोषणा Actually Operational
नेहरू सरकार (1956) 1 (AIIMS दिल्ली) 1
1956–2003 (47 साल, कई सरकारें) 0 0
वाजपेयी / NDA (2003–2004) 6 0 (उनके कार्यकाल में नहीं बने)
मनमोहन / UPA (2004–2014) 1 और 6 (वाजपेयी वाले) + 1 अधूरा
मोदी / NDA (2014–2026) 15+ ~13 अब तक
कुल 2026 तक 26 approved 20 operational

तो असली तस्वीर क्या है?

अगर आप किसी भी political चश्मे को उतारकर देखें, तो एक बात साफ नज़र आती है — AIIMS का विस्तार कभी भी एक अकेली सरकार की कहानी नहीं रही। वाजपेयी ने बीज बोया, मनमोहन ने सींचा, और मोदी ने पूरा जंगल उगाने की कोशिश की।

लेकिन एक सवाल जो सोचने पर मजबूर करता है — अगर 1956 के बाद ही सोच लिया गया होता कि हर 10 साल में कम से कम 2 AIIMS बनेंगे, तो आज देश में 60-70 AIIMS होते। और शायद कोटा के छात्रों को NEET की तैयारी के लिए इतनी जान नहीं लगानी पड़ती, शायद दूर-दराज के गाँव के मरीज को इलाज के लिए सैकड़ों किलोमीटर नहीं भटकना पड़ता।

20 AIIMS — यह उपलब्धि ज़रूर है। लेकिन 140 करोड़ की आबादी के लिए 20 AIIMS काफी हैं? यह सवाल आपके और हमारे सोचने का है।

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