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भारत की AI शिक्षा में नैतिकता की कमी: तकनीकी विकास का अधूरा पाठ

भारत की AI शिक्षा में नैतिकता की कमी_ तकनीकी विकास का अधूरा पाठ

भारत की AI शिक्षा में नैतिकता की कमी_ तकनीकी विकास का अधूरा पाठ

कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence – AI) आज सिर्फ तकनीकी क्रांति का हिस्सा नहीं है, बल्कि यह हमारी सामाजिक संरचना, नैतिक मूल्यों और लोकतांत्रिक व्यवस्था पर गहरा असर डाल रही है। भारत जैसे देश, जहाँ आईटी और इंजीनियरिंग शिक्षा विश्व स्तर पर मशहूर है, वहाँ AI शिक्षा का विस्तार तेज़ी से हो रहा है। लेकिन हाल ही में आए अध्ययनों से यह स्पष्ट हुआ है कि भारतीय विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के पाठ्यक्रमों में AI की नैतिकता (Ethics in AI) पर बेहद कम ध्यान दिया जा रहा है। यह कमी भविष्य में गंभीर चुनौतियाँ खड़ी कर सकती है।

तकनीकी ज्ञान बनाम नैतिक दृष्टिकोण

भारत में अधिकांश कंप्यूटर साइंस और AI से जुड़े कोर्स तकनीकी पक्षों पर केंद्रित हैं—जैसे मशीन लर्निंग, डेटा साइंस, न्यूरल नेटवर्क और एल्गोरिदम। इन पाठ्यक्रमों में छात्रों को सिखाया जाता है कि AI कैसे बनाया जाए, लेकिन यह नहीं बताया जाता कि AI का उपयोग कब और कैसे होना चाहिए।

नैतिक दृष्टिकोण की कमी के कारण छात्र तकनीकी रूप से सक्षम तो हो जाते हैं, परंतु उनके पास यह समझ नहीं होती कि गलत एल्गोरिदम, पक्षपातपूर्ण डेटा या गोपनीयता का उल्लंघन समाज के लिए कितना खतरनाक हो सकता है।

AI नैतिकता क्यों ज़रूरी है?

  1. पक्षपात (Bias) का खतरा: अगर AI सिस्टम पक्षपातपूर्ण डेटा पर प्रशिक्षित हो, तो वह सामाजिक असमानताओं को और गहरा सकता है।
  2. गोपनीयता (Privacy) का सवाल: बिना नैतिक मार्गदर्शन के, AI कंपनियाँ यूज़र डेटा का दुरुपयोग कर सकती हैं।
  3. जवाबदेही (Accountability): अगर किसी AI निर्णय से किसी व्यक्ति को नुकसान होता है, तो इसकी जिम्मेदारी तय करना मुश्किल हो जाता है।
  4. लोकतंत्र पर असर: गलत तरीके से इस्तेमाल होने पर AI चुनावों, मीडिया और जनमत को प्रभावित कर सकता है।

भारत की मौजूदा स्थिति

हालिया शोध दर्शाते हैं कि भारत के केवल कुछ ही संस्थानों ने अपने AI पाठ्यक्रम में नैतिकता को शामिल किया है, वह भी अक्सर वैकल्पिक (optional) विषय के रूप में। अधिकतर इंजीनियरिंग कॉलेजों में नैतिकता पढ़ाई ही नहीं जाती। इसके विपरीत, यूरोप और अमेरिका में AI पढ़ाने वाले विश्वविद्यालयों ने “Ethics by Design” जैसे विषयों को अनिवार्य कर दिया है।

क्या होना चाहिए?

  1. पाठ्यक्रम में सुधार: AI शिक्षा का हिस्सा नैतिकता और नीति-निर्माण को अनिवार्य करना चाहिए।
  2. व्यावहारिक केस स्टडीज़: छात्रों को ऐसे उदाहरणों से अवगत कराना चाहिए जहाँ AI के गलत उपयोग से समाज को नुकसान हुआ।
  3. बहु-विषयक दृष्टिकोण: तकनीकी छात्रों को समाजशास्त्र, दर्शन और कानून जैसे विषयों से भी जोड़ना ज़रूरी है।
  4. सरकारी नीति: शिक्षा मंत्रालय को एकीकृत गाइडलाइन जारी करनी चाहिए जिससे सभी संस्थानों में AI नैतिकता का पाठ शामिल हो।

भारत तकनीकी रूप से एक अग्रणी राष्ट्र बनने की राह पर है, लेकिन यदि AI शिक्षा में नैतिकता को नज़रअंदाज़ किया गया तो यह विकास अधूरा साबित होगा। तकनीक केवल तभी लाभकारी है जब उसका इस्तेमाल जिम्मेदारी और पारदर्शिता के साथ किया जाए।

आज आवश्यकता इस बात की है कि हम न केवल “AI इंजीनियर” तैयार करें बल्कि ऐसे “AI जिम्मेदार नागरिक” भी गढ़ें, जो तकनीकी दक्षता के साथ मानवीय मूल्यों को भी समझते हों।

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