Ujjwala Yojana की सच्चाई: 12 से 9 और अब 9 से 4 सब्सिडी वाले गैस — गरीब की रसोई पर हर बार कैंची
एक गरीब घर की औरत सोचती है — “चलो, सरकार ने gas connection दिया, अब लकड़ी का धुआँ नहीं खाना पड़ेगा।” लेकिन कुछ महीने बाद refill के पैसे नहीं होते। Cylinder रखा रहता है, चूल्हा वापस जल उठता है। यही है Ujjwala Yojana की असली कहानी — जो सरकारी आंकड़ों में कहीं नहीं दिखती।
लेकिन इस कहानी को समझने के लिए थोड़ा पीछे जाना होगा।
Connection मिला = paper पर success। Refill afford नहीं हुई = असली ज़िंदगी में failure।
सरकार कहती है — 10.5 करोड़ से ज़्यादा free connections दिए। यह सच है। लेकिन connection मिलना और उसका इस्तेमाल होना — दोनों अलग बात है।
- LPG connections 16% बढ़े — लेकिन actual cylinder बिक्री सिर्फ 9.8% बढ़ी
- करोड़ों महिलाओं ने connection लिया — लेकिन refill afford नहीं हो पाई, वापस लकड़ी जलाने लगीं
- CAG report के अनुसार औसत consumption 3.53 cylinders — मतलब 4 की limit वैसे भी उनकी ज़रूरत से ज़्यादा नहीं थी
- Parliament में खुद सरकार ने माना — लाखों beneficiaries ने एक भी refill नहीं करवाई
सरकार कह रही है — “हमने 4 इसलिए किए क्योंकि average consumption 3.53 है।” लेकिन यह average इसलिए कम है क्योंकि गरीब refill afford ही नहीं कर पाते। गरीबी को data बनाकर subsidy काटना — यह कहाँ का न्याय है?
एक जागरूक नागरिक होने के नाते हमें यह सवाल पूछते रहना है — चाहे सरकार कोई भी हो। क्योंकि जब तक हम चुप रहेंगे, गरीब की रसोई पर कैंची चलती रहेगी।
