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गुजरात निकाय चुनाव 2026 — पूरे नतीजे और ज़मीनी हकीकत

गुजरात निकाय चुनाव 2026 — पूरे नतीजे और ज़मीनी हकीकत

Laxmi Nautiyal, April 29, 2026April 29, 2026

गुजरात में 26 अप्रैल 2026 को स्थानीय निकाय चुनाव हुए और 28 अप्रैल को नतीजे आए। यह चुनाव इसलिए भी खास था क्योंकि गुजरात में विधानसभा चुनाव भी जल्द होने वाले हैं, इसलिए इन नतीजों को सभी पार्टियाँ बहुत गंभीरता से देख रही थीं।

इस बार कितनी सीटों पर हुआ चुनाव

इस चुनाव में 15 नगर निगम, 84 नगरपालिका, 34 जिला पंचायत और 260 तालुका पंचायतों की कुल 10,005 सीटों पर वोटिंग हुई। पूरे गुजरात में करीब 4.18 करोड़ मतदाताओं ने अपना वोट डाला। यह चुनाव गुजरात के शहरी और ग्रामीण दोनों इलाकों को मिलाकर हुआ, इसलिए इसके नतीजे पूरे राज्य की राजनीतिक तस्वीर को दर्शाते हैं।

BJP — हर तरफ जीत ही जीत

भाजपा के लिए यह चुनाव किसी बड़े जश्न से कम नहीं रहा। पार्टी ने राज्य के सभी 15 नगर निगमों पर जीत हासिल की। अहमदाबाद, सूरत, वडोदरा और राजकोट जैसे बड़े शहरों में BJP ने एकतरफा बढ़त बनाई। कुल मिलाकर पूरे राज्य में BJP ने 7,491 सीटें जीतीं। ग्रामीण इलाकों में भी BJP का दबदबा दिखा — 34 जिला पंचायतों की 1,090 सीटों में से 568 सीटें BJP के खाते में गईं। 260 तालुका पंचायतों की 5,234 सीटों में से भी BJP ने 2,397 सीटें जीतीं। यह जीत 2021 के निकाय चुनावों जैसी ही रही जब BJP ने सभी नगर निगमों पर कब्जा किया था।

कांग्रेस — उम्मीद से भी कम मिला

कांग्रेस के लिए यह चुनाव निराशाजनक रहा। पार्टी को पूरे राज्य में सिर्फ 1,740 सीटें ही मिल पाईं। जिला पंचायतों में कांग्रेस को केवल 77 सीटें मिलीं जो कि उनके प्रदर्शन की असली तस्वीर दिखाती है। शहरों में तो कांग्रेस का हाल और भी बुरा रहा। सूरत में कांग्रेस के उम्मीदवारों ने भ्रष्टाचार के मुद्दे उठाए थे लेकिन जनता ने उन पर भरोसा नहीं जताया।

AAP — गाँव में थोड़ी उम्मीद, शहर में झटका

आम आदमी पार्टी के लिए यह चुनाव मिला-जुला रहा। शहरों में AAP को बड़ा झटका लगा और उनका जनाधार घटा। लेकिन आदिवासी इलाकों और दक्षिण गुजरात में AAP ने अच्छा प्रदर्शन किया। दाहोद, भरूच और छोटाउदयपुर जैसे ग्रामीण इलाकों में AAP के उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की। इसके अलावा कच्छ की भुज नगरपालिका में AIMIM के तीन उम्मीदवार भी जीते जो उस इलाके में उनकी पहली जीत है।

ग्राउंड रियलिटी क्या कहती है

नतीजे तो आ गए लेकिन असली सवाल यह है कि क्या इन चुनावों में जनता के असली मुद्दे उठे। गुजरात के कई इलाकों में पानी की कमी, बिजली की समस्या और किसानों की बदहाली जैसे मुद्दे अभी भी बने हुए हैं। BJP की जीत बड़ी ज़रूर है लेकिन क्या यह जीत उन लोगों तक पहुँचेगी जो आज भी अपनी बुनियादी ज़रूरतों के लिए संघर्ष कर रहे हैं — यही असली परीक्षा है।

आगे क्या होगा

इन नतीजों के बाद BJP का हौसला बहुत बुलंद है और आने वाले विधानसभा चुनावों में पार्टी इसी जीत को अपनी ताकत बनाकर उतरेगी। कांग्रेस को अपनी रणनीति पर फिर से सोचना होगा और AAP को तय करना होगा कि वो गुजरात में किस तरह की राजनीति करना चाहती है।

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