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अंकिता भंडारी केस

अंकिता भंडारी की मौत: क्या इंसाफ पूरा हुआ या सच अब भी छिपा है?

Laxmi Nautiyal, January 13, 2026January 13, 2026

उत्तराखंड की अंकिता भंडारी का मामला केवल एक हत्या का केस नहीं है, बल्कि यह सिस्टम, सत्ता और इंसाफ पर उठते कई गंभीर सवालों की कहानी है। यह केस आज भी लोगों के ज़हन में इसलिए ज़िंदा है क्योंकि सज़ा के बावजूद कई पहलू अब तक साफ़ नहीं हो पाए हैं।

अंकिता भंडारी कौन थी?

अंकिता भंडारी 19 साल की एक सामान्य लड़की थी, जो अपने परिवार की मदद के लिए एक रिज़ॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट की नौकरी कर रही थी। वह उत्तराखंड के पौड़ी ज़िले से ताल्लुक रखती थी। सितंबर 2022 में वह अचानक लापता हो गई, और कुछ दिनों बाद उसका शव एक नहर से बरामद हुआ। यहीं से पूरे राज्य में आक्रोश फैल गया।

हत्या और आरोप

जांच में सामने आया कि जिस रिज़ॉर्ट में अंकिता काम करती थी, उसके मालिक के बेटे और उसके दो साथियों ने मिलकर इस जघन्य अपराध को अंजाम दिया। बाद में अदालत ने तीनों को दोषी मानते हुए उम्रकैद की सज़ा सुनाई। काग़ज़ों में मामला यहीं खत्म हो गया, लेकिन ज़मीनी हकीकत में सवाल बने रहे।

VIP एंगल का विवाद

इस केस में सबसे ज़्यादा चर्चा तथाकथित “VIP एंगल” को लेकर हुई। दावा किया गया कि अंकिता पर किसी प्रभावशाली व्यक्ति को “खास सेवा” देने का दबाव बनाया गया था। कहा गया कि अंकिता ने इसका विरोध किया, और यही उसकी हत्या की वजह बनी। हालांकि, इस दावे को लेकर आज तक कोई ठोस नाम या कानूनी पुष्टि सामने नहीं आ सकी है।

वायरल दावे और जनता का गुस्सा

समय के साथ कुछ ऑडियो और वीडियो सामने आए, जिनमें बड़े लोगों के शामिल होने की बात कही गई। इन दावों ने जनता के गुस्से को और भड़का दिया। कई जगह विरोध प्रदर्शन हुए, बंद बुलाए गए और सरकार से निष्पक्ष जांच की मांग तेज़ हो गई।

सरकार और जांच पर सवाल

सरकार और पुलिस की ओर से यह कहा गया कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष थी और किसी को बचाने की कोशिश नहीं की गई। फिर भी लोगों का भरोसा पूरी तरह बहाल नहीं हो पाया। इसी दबाव के बीच मामले की दोबारा गहन जांच की बात सामने आई, ताकि हर शक और हर सवाल का जवाब मिल सके।

आज भी बाकी है इंसाफ का इंतज़ार

अंकिता के दोषियों को सज़ा तो मिली, लेकिन क्या पूरा सच सामने आया? क्या वाकई कोई ताक़तवर व्यक्ति इस मामले में शामिल था? या फिर यह एंगल सिर्फ़ अफ़वाह बनकर रह गया?
आज भी यह केस हमें याद दिलाता है कि इंसाफ सिर्फ़ सज़ा से नहीं, बल्कि पूरे सच के सामने आने से पूरा होता है।

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