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भारत की जलवायु रैंकिंग में बड़ी गिरावट

भारत की जलवायु रैंकिंग में बड़ी गिरावट: पर्यावरण नीतियों पर उठे सवाल

एक जागरूक नागरिक, November 19, 2025November 19, 2025

ग्लोबल क्लाइमेट चेंज परफॉर्मेंस इंडेक्स की नई रिपोर्ट में भारत को बड़ा झटका लगा है। इस बार भारत की रैंकिंग में 13 स्थान की गिरावट दर्ज की गई है, जिसके बाद देश 23वें स्थान पर पहुंच गया है। यह गिरावट जलवायु परिवर्तन के प्रति भारत की रणनीतियों और नीतियों पर गंभीर प्रश्न खड़े करती है।

भारत की रैंकिंग में गिरावट क्यों आई

रिपोर्ट के अनुसार रैंकिंग में गिरावट का मुख्य कारण है कि कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में प्रगति धीमी रही है। इनमें हवा की गुणवत्ता, नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग, ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी और जलवायु नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन जैसे पहलू शामिल हैं।

ऊर्जा क्षेत्र में धीमी प्रगति

भारत नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में दुनिया का बड़ा खिलाड़ी बन चुका है, लेकिन जमीन पर लागू होने वाले प्रोजेक्ट्स की रफ्तार उम्मीद से कम रही। कई क्षेत्रों में कोयले पर निर्भरता अभी भी अधिक है, जिससे कुल उत्सर्जन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा।

प्रदूषण और एयर क्वालिटी एक बड़ी चुनौती

देश के कई महानगर लगातार खराब वायु गुणवत्ता की समस्या से जूझ रहे हैं। सर्दियों के मौसम में प्रदूषण का स्तर और भी बढ़ जाता है, जिसकी वजह से पर्यावरणीय प्रदर्शन प्रभावित होता है। प्रदूषण नियंत्रण के लिए बनाई गई योजनाओं का असर अभी तक जमीन पर मजबूत रूप में दिखाई नहीं देता।

जलवायु नीति में सुधार की जरूरत

विशेषज्ञों के अनुसार भारत को अपनी जलवायु नीतियों को और अधिक सख्त और प्रभावी बनाना होगा। खासकर शहरी विकास, उद्योग, ऊर्जा और कृषि से जुड़े नियमों को सख्ती से लागू करने की आवश्यकता है।
इसके साथ-साथ कार्बन उत्सर्जन को नियंत्रित करने, हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने और वायु प्रदूषण नियंत्रण पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि पर असर

भारत पिछले कई वर्षों से जलवायु परिवर्तन के वैश्विक प्रयासों में अग्रणी देशों में गिना जाता रहा है। रैंकिंग में यह गिरावट अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि को कमजोर कर सकती है और भविष्य की जलवायु साझेदारियों पर भी प्रभाव डाल सकती है।

हालांकि चुनौतियाँ बड़ी हैं, लेकिन समाधान मौजूद हैं। नवीकरणीय ऊर्जा की क्षमता बढ़ाकर, प्रदूषण नियंत्रण पर सख्ती करके, और उद्योगों में हरित तकनीक को अपनाकर भारत अपनी रैंकिंग को सुधार सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नीतियों को तेज गति से लागू किया जाए, तो आने वाले वर्षों में भारत फिर से शीर्ष प्रदर्शन करने वाले देशों में शामिल हो सकता है।

भारत में क्लाइमेट चेंज: यह सबसे बड़ा मुद्दा क्यों होना चाहिए और इस पर चर्चा क्यों कम होती है

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