Skip to content
Thehindinews
Thehindinews

  • Home
  • News Article
  • Story
  • Information
  • blog
  • Life Style
  • About Us
  • Contact
Thehindinews
Thehindinews

नक्सल कमांडर मादवी हिडमा ढेर

नक्सल कमांडर मादवी हिडमा ढेर: दो दशकों तक खूनी हमलों की अगुवाई करने वाला सबसे खतरनाक चेहरा अब खत्म

Laxmi Nautiyal, November 18, 2025November 18, 2025

देश के सबसे कुख्यात नक्सली कमांडरों में से एक मादवी हिडमा आखिरकार सुरक्षा बलों की कार्रवाई में मारा गया। लगभग दो दशक से ज्यादा समय तक सुरक्षा एजेंसियों के लिए सिरदर्द बने रहे हिडमा पर कई बड़े हमलों का आरोप था। उसकी मौत नक्सल मोर्चे पर एक बड़ी सफलता मानी जा रही है। यह ऑपरेशन योजनाबद्ध तरीके से किया गया, जिसमें विशेष बलों ने घने जंगलों में उसकी मौजूदगी की खुफिया जानकारी मिलने के बाद घेराबंदी की और मुठभेड़ में उसे ढेर कर दिया गया।

कौन था मादवी हिडमा?

मादवी हिडमा छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र का रहने वाला था और नक्सल संगठन में प्लाटून नंबर 10 तथा बाद में पीएलजीए बटालियन नंबर 1 का मुखिया बन गया था। यह वही बटालियन है जो नक्सलियों की सबसे प्रशिक्षित और घातक इकाई मानी जाती है।
कम उम्र में नक्सल संगठन से जुड़ने के बाद उसने तेज़ी से रैंक हासिल की और दंडकारण्य स्पेशल ज़ोन कमेटी में प्रभावशाली कमांडर बन गया। स्थानीय भूगोल की जानकारी, गुरिल्ला रणनीतियों में महारत और अपने दस्ते पर मजबूत पकड़ के कारण पुलिस और सुरक्षा एजेंसियाँ उसे वर्षों तक ढूंढ नहीं पाईं।

हिडमा पर लगे प्रमुख हमलों के आरोप

मादवी हिडमा पर कई बड़े, खूनी और रणनीतिक हमलों का आरोप था। इन्हीं हमलों के कारण वह देश की सुरक्षा एजेंसियों की “मोस्ट वांटेड” सूची में शामिल था:

● दंतेवाड़ा में सुरक्षाबलों पर हमला (2010)

इस हमले में 70 से ज्यादा सीआरपीएफ जवान मारे गए थे। यह नक्सल इतिहास के सबसे भीषण हमलों में से एक था, और इसी घटना के बाद हिडमा का नाम राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित हुआ।

● ताड़मेटला हमला (2013)

इस हमले में कई सुरक्षाकर्मी और राजनीतिक कार्यकर्ता मारे गए तथा सैकड़ों घायल हुए। इसका संचालन भी हिडमा के दस्ते ने किया था।

● बुर्खापाल हमला (2017)

सीआरपीएफ की टुकड़ी पर अचानक घात लगाकर किए गए हमले में 25 जवान शहीद हुए। यह ऑपरेशन भी हिडमा की योजना और नेतृत्व में हुआ था।

● अप्रैल 2021 का बड़ा एंबुश

इसमें कई जवान मारे गए और कई घायल हुए। यह हमला उसकी रणनीति और जंगल युद्धक क्षमताओं को फिर से उजागर करता है।

इन घटनाओं ने उसे नक्सली संगठन का सबसे निर्दयी और चालाक कमांडर बना दिया था, जिसके पीछे कई सुरक्षा एजेंसियाँ लगातार लगी हुई थीं।

कैसे मारा गया मादवी हिडमा?

लगातार मिल रही खुफिया जानकारी के आधार पर सुरक्षा बलों ने स्पेशल ऑपरेशन चलाया। बताया जाता है कि हिडमा अपने दस्ते के साथ जंगल में मूवमेंट कर रहा था और इसी दौरान उसे चारों ओर से घेरा गया।

सुरक्षाबलों ने उसके संभावित ठिकानों की पहले से निगरानी की हुई थी। घिरे जाने पर हिडमा और उसके दस्ते ने गोलीबारी शुरू कर दी, जिसके जवाब में सुरक्षा बलों ने सटीक कार्रवाई की। मुठभेड़ के दौरान हिडमा को मार गिराया गया।

उसके पास से हथियार, संचार उपकरण और कई दस्तावेज बरामद किए गए हैं, जो आगे की जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

हिडमा की मौत का क्या मतलब है?

  • यह नक्सलियों के नेटवर्क के लिए एक बड़ा झटका है क्योंकि हिडमा जैसी सैन्य रणनीति और जंगल-युद्ध कौशल वाला नेता संगठन में अब बेहद कम है।
  • उसके नेतृत्व में चलने वाले कई दस्तों की कमान अब कमजोर पड़ सकती है।
  • सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इससे नक्सलियों की बड़ी योजनाओं पर रोक लगेगी और प्रभावित इलाकों में विकास कार्यों को गति मिलेगी।

हालाँकि मादवी हिडमा की मौत नक्सल मोर्चे पर एक ऐतिहासिक उपलब्धि है, लेकिन नक्सल चुनौती पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। कई क्षेत्रों में अभी भी नक्सली सक्रिय हैं और वे स्थानीय जनभावनाओं, भूगोल और छिपाव की रणनीति का फायदा उठाते हैं।

सरकार के सामने दोहरी चुनौती होगी —

  1. सुरक्षात्मक कार्रवाई जारी रखना
  2. और साथ ही इस क्षेत्र के लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बुनियादी सुविधाएँ उपलब्ध कराना

दिल्ली में लाल क़िला विस्फोट: राजधानी को दहलाने वाली घटना, जांच में कई अहम सुराग़

Information News Article

Post navigation

Previous post
Next post

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Advertisement

Author Name

एक जागरूक नागरिक

Becoming an aware citizen is everyone's responsibility.

social link

  • Facebook
  • Twitter
July 2026
M T W T F S S
 12345
6789101112
13141516171819
20212223242526
2728293031  
« Jun    
  • July 7, 2026 by Laxmi Nautiyal गरीबी की जड़ ज़्यादा बच्चे या कम संसाधन? पूरा सच जानिए
  • July 6, 2026 by Laxmi Nautiyal दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे में सिर्फ 79 दिन में गड्ढे — ₹12,000 करोड़ गए कहां?
  • June 20, 2026 by Laxmi Nautiyal अमेरिका में Data Centers बैन, भारत में खुली छूट — पानी का संकट किसे दिखता नहीं?
  • June 19, 2026 by Laxmi Nautiyal भारत में AIIMS का इतिहास: 1956 से 2026 तक कब बने, किसने बनाए, कितने बने
  • June 19, 2026 by Laxmi Nautiyal छात्रों की गूंज महारैली: कोटा में राहुल गांधी ने NEET पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल
  • गरीबी की जड़ ज़्यादा बच्चे या कम संसाधन? पूरा सच जानिए
  • दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे में सिर्फ 79 दिन में गड्ढे — ₹12,000 करोड़ गए कहां?
  • अमेरिका में Data Centers बैन, भारत में खुली छूट — पानी का संकट किसे दिखता नहीं?
  • भारत में AIIMS का इतिहास: 1956 से 2026 तक कब बने, किसने बनाए, कितने बने
  • छात्रों की गूंज महारैली: कोटा में राहुल गांधी ने NEET पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल

Advertisement




©2026 Thehindinews | WordPress Theme by SuperbThemes
Go to mobile version