स्कूलों के बंद होने का सच: क्या यह सिर्फ शिक्षा का नुकसान है या राजनीति का हिस्सा? Hindi News, October 12, 2025October 12, 2025 आजकल कई क्षेत्रों में स्कूल धीरे-धीरे बंद हो रहे हैं। यह सिर्फ बच्चों की पढ़ाई पर असर डालता है, बल्कि समाज और भविष्य पर भी गहरा प्रभाव डाल सकता है। आइए समझते हैं कि स्कूलों के बंद होने के पीछे क्या कारण हैं और क्या इसमें राजनीति का कोई हाथ हो सकता है। शिक्षा पर प्रत्यक्ष प्रभाव जब स्कूल बंद होते हैं, तो सबसे पहला असर सीधे बच्चों की पढ़ाई पर पड़ता है। छोटे शहरों और गाँवों में कई बच्चे स्कूल की पढ़ाई पूरी नहीं कर पाते। डिजिटल शिक्षा के विकल्प हर किसी के लिए उपलब्ध नहीं हैं, इसलिए कई बच्चे शिक्षा से दूर हो जाते हैं। समाज और भविष्य पर असर स्कूल केवल पढ़ाई का स्थान नहीं हैं, बल्कि बच्चों में सामाजिक और नैतिक मूल्यों को विकसित करने का माध्यम भी हैं। जब स्कूल बंद होते हैं, तो बच्चों की मानसिक और सामाजिक विकास पर असर पड़ता है। इसके अलावा, लंबी अवधि में यह असमानता और बेरोजगारी बढ़ाने का कारण बन सकता है। क्या राजनीति इसमें शामिल है? कुछ लोग मानते हैं कि स्कूलों के बंद होने में राजनीति भी शामिल हो सकती है। शिक्षा का स्तर घटाने से समाज के कुछ हिस्सों को नियंत्रित करना आसान हो जाता है। बच्चों और युवाओं की शिक्षा पर असर डालकर भविष्य में राजनीतिक और सामाजिक निर्णयों में उनका दृष्टिकोण प्रभावित किया जा सकता है। हालांकि यह पूरी तरह साबित नहीं है, लेकिन सवाल उठना स्वाभाविक है। आर्थिक कारण और स्कूलों की स्थिरता स्कूलों के बंद होने के पीछे अक्सर आर्थिक कारण भी होते हैं। शिक्षकों की कमी, कम फीस वसूलना, सरकारी सहायता में कमी, और ग्रामीण क्षेत्रों में छात्रों की संख्या कम होना मुख्य कारण हैं। लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या यह सिर्फ आर्थिक कारण हैं या राजनीतिक रणनीति भी इसमें शामिल है। जब शिक्षा तहस-नहस हो रही है तो इस पर कोई बहस क्यों नहीं होती? स्कूलों के लगातार बंद होने और शिक्षा के स्तर में गिरावट के बावजूद, समाज में इस गंभीर मुद्दे पर पर्याप्त बहस नहीं होती। मीडिया में यह खबरें आती हैं, लेकिन गहन चर्चा और समाधान की दिशा में काम कम ही होता है। यह सवाल उठता है कि क्या लोगों का ध्यान केवल राजनीतिक या आर्थिक मामलों पर है, और बच्चों की पढ़ाई पर कम ध्यान दिया जा रहा है। शिक्षा केवल बच्चों की व्यक्तिगत तरक्की का माध्यम नहीं है, बल्कि यह समाज और भविष्य की नींव भी है। जब यह तहस-नहस हो रही है, तो इस पर खुली बहस और समाधान ढूँढना क्यों नजरअंदाज किया जा रहा है, यह एक बड़ा चिंताजनक पहलू है। समाधान और हमारी जिम्मेदारी स्थानीय और राज्य स्तर पर शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए विशेष योजनाएँ बनानी होंगी।डिजिटल शिक्षा के विकल्प हर बच्चे तक पहुँचाने होंगे।समाज और अभिभावकों को मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि बच्चों की पढ़ाई में कोई बाधा न आए। नोट: स्कूलों के बंद होने का मुद्दा केवल शिक्षा का नहीं है, बल्कि समाज और भविष्य के लिए बड़ा चुनौतीपूर्ण विषय है। यह समय है जागरूक होने और हर बच्चे तक शिक्षा पहुँचाने की। भारत में Civic Sense बिल्कुल ना के बराबर: स्कूलों में भी Civic Sense पढ़ाना जरूरी News Article